Muzaffarpur News: मातृत्व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और नवजात बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी जिलों में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए सिफलिस और एचआईवी (HIV) की जांच अनिवार्य कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं. जांच में कोई बाधा न आए, इसके लिए मुख्यालय द्वारा आवश्यक जांच किट की आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है. इसके साथ ही सभी जिलों को इन जांचों की रिपोर्ट नियमित रूप से मुख्यालय भेजने को कहा गया है.
नवजात को संक्रमण से बचाएगा यह कदम
स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा सिंह ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य आने वाले बच्चे को जन्मजात बीमारियों से सुरक्षित रखना है. सिफलिस से पीड़ित गर्भवती महिला के कारण प्रसव के दौरान नवजात शिशु में भी संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा रहता है. अब जांच अनिवार्य होने से समय रहते संक्रमण का पता लगाकर गर्भ में पल रहे बच्चे को संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा.
बीमारी के लक्षण और 42 दिनों का विशेष इलाज
डॉ. प्रेरणा सिंह के मुताबिक सिफलिस होने पर महिलाओं के जननांग और जांघ के ऊपरी हिस्से में अल्सर या घाव हो जाते हैं. यह बीमारी जानलेवा नहीं है और मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध के कारण फैलती है. सही समय पर पहचान होने से यह पूरी तरह ठीक हो जाती है. लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत अस्पताल आना चाहिए, जहां इसका छह हफ्ते (42 दिन) का विशेष दवा कोर्स दिया जाता है.
मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
