मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में इस बार एईएस (चमकी बुखार) को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. पिछले पांच वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब मई महीने में एईएस का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ. आमतौर पर मई और जून के दौरान यह बीमारी बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आती थी, लेकिन इस साल स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और जागरूकता अभियान का असर साफ दिखाई दे रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक एक भी बच्चे की मौत एईएस से नहीं हुई है.
पांच साल में पहली बार मई रहा एईएस मुक्त
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्यालय भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में उत्तर बिहार के किसी भी जिले से एईएस का मरीज सामने नहीं आया. इसका असर एसकेएमसीएच के पीकू वार्ड में भी देखने को मिला, जहां पूरे महीने एक भी एईएस पीड़ित बच्चे को भर्ती नहीं करना पड़ा. यह स्थिति पिछले कई वर्षों की तुलना में काफी अलग और राहत देने वाली मानी जा रही है.
जनवरी से मई तक सिर्फ 32 मामले
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से मई तक उत्तर बिहार में एईएस के केवल 32 मामले सामने आए हैं. राहत की बात यह भी है कि इनमें किसी भी बच्चे की जान नहीं गई. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय रहते पहचान और इलाज मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सका.
जागरूकता अभियान का दिखा असर
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, इस बार गांव-गांव में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया. अभिभावकों को चमकी बुखार के शुरुआती लक्षणों की जानकारी दी गई और बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया. इसी वजह से मरीजों को जल्दी उपचार मिला और स्थिति नियंत्रण में रही.
जून को लेकर विभाग अब भी अलर्ट
हालांकि मई राहत भरा रहा, लेकिन जून को एईएस के लिहाज से संवेदनशील महीना माना जाता है. इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अभी भी पूरी तरह सतर्क है. अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए गए हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट मोड में रखा गया है, ताकि इस सकारात्मक स्थिति को आगे भी बरकरार रखा जा सके.
