Nagar Nigam boundary expansion: मुजफ्फरपुर नगर निगम की सीमा विस्तार (विस्तारीकरण) का इंतजार कर रहे शहरवासियों और आसपास के ग्रामीणों के लिए एक बड़ी खबर है. जनगणना के नियमों के पेंच में फंसा मुजफ्फरपुर का क्षेत्र विस्तार अब नए सिरे से शुरू होने जा रहा है. नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने मुजफ्फरपुर समेत राज्य के सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को कड़ा निर्देश जारी कर ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलों को फिर से खोलने को कहा है. इसके तहत मुजफ्फरपुर नगर निगम के विस्तार के साथ-साथ राज्य के अन्य निकायों के गठन की प्रक्रिया को भी हरी झंडी दे दी गई है.विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से जुड़ी रोक के समानांतर ही विस्तारीकरण की तैयारी पूरी कर ली जाएगी. विभाग द्वारा समीक्षा किए गए कुल 29 लंबित प्रस्तावों की सूची में मुजफ्फरपुर जिले का प्रस्ताव संख्या-27 पर दर्ज है. विभाग ने आदेश दिया है कि मुजफ्फरपुर नगर निगम से सटे जो ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाके पूरी तरह शहरी स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं, उन्हें नगर निगम की सीमा में शामिल करने की प्रक्रिया को तत्काल अंतिम रूप दिया जाए. इस मंजूरी के बाद मुजफ्फरपुर नगर निगम में कुल वार्डों की संख्या बढ़कर 70 से 75 के बीच हो जाएगी.
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क्यों और कैसे लगा था विस्तारीकरण पर 'सेंसर'?
बिहार सरकार ने वर्ष 2020 में नगर पालिका अधिनियम में संशोधन कर बड़े पैमाने पर शहरों के विस्तारीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी. इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर नगर निगम की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था. लेकिन, बीच में भारत की जनगणना-2027 का कार्य शुरू हो गया. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना के अनुसार, जनगणना कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए नियमों के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य के सभी जिलों, प्रखंडों, पंचायतों और शहरों की प्रशासनिक सीमाओं में किसी भी प्रकार के बदलाव पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी. इसी कारण मुजफ्फरपुर नगर निगम के विस्तार का प्रस्ताव भी अधर में लटक गया था.
आबादी और गैर-कृषि कार्य के आधार पर होगा गठन
- डीएम को भेजे गए निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि विस्तारीकरण और नए निकायों के गठन के लिए मुख्य रूप से दो पैमाने तय किए गए हैं:
- आबादी का नियम: नगर पंचायत के लिए 09 हजार से 30 हजार, नगर परिषद के लिए 30 हजार से 1.50 लाख तथा नगर निगम के लिए 1.50 लाख या उससे अधिक की जनसंख्या होनी चाहिए.
- गैर-कृषि कार्य: सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि शहर में शामिल किए जाने वाले नए इलाकों में खेती-किसानी करने वाले लोगों (कृषि कर्मियों) की संख्या कुल कार्यशील आबादी के 50 प्रतिशत से कम होनी चाहिए. यानी, वहां के आधे से अधिक लोग गैर-कृषि कार्यों (नौकरी, व्यापार, मजदूरी आदि) से जुड़े होने चाहिए.
गूगल मैप और 19 बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट, 30 अगस्त तक का समय
मुजफ्फरपुर के डीएम को अब 19 बिंदुओं वाले विहित प्रपत्र (फॉर्म) में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजनी है. इसमें शामिल किए जाने वाले नए गांवों के नाम, उनका थाना नंबर, वहां की कुल आबादी, सांख्यिकीय आंकड़े तथा आय के स्रोतों का पूरा विवरण देना होगा. इसके साथ ही, नए इलाकों की सटीक सीमाओं को दर्शाने के लिए ए-0 आकार के पेपर पर नवीनतम गूगल मैप तैयार करना होगा. इस नक्शे पर स्केच पेन से मार्किंग कर घरों और आबादी की स्थिति (टॉप व्यू) दर्शाना अनिवार्य किया गया है. मुजफ्फरपुर प्रशासन को यह पूरा समेकित प्रस्ताव नक्शे के साथ 30 अगस्त तक हर हाल में विभाग को सौंपना है.
