SBI क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने का डर दिखा 3.43 लाख की ठगी, रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करा उड़ाए पैसे

मुजफ्फरपुर में एक SBI क्रेडिट कार्ड धारक को साइबर ठगों ने निशाना बनाया. कार्ड ब्लॉक और हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर डराकर उसके खाते से 3 लाख 43 हजार 370 रुपये उड़ा लिए गए. पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, पुलिस जांच में जुटी है.

Cyber Crime: मुजफ्फरपुर जिले में साइबर अपराधियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब शातिरों ने एक एसबीआई (SBI) क्रेडिट कार्ड धारक को अपना निशाना बनाया है. कार्ड ब्लॉक होने और हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर पैसे कटने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने एक व्यक्ति के खाते से 3 लाख 43 हजार 370 रुपये उड़ा लिए. इस बड़ी ठगी को लेकर पीड़ित ने जिले के साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

इंश्योरेंस चार्ज रोकने के नाम पर किया फोन

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला कांटी थाना क्षेत्र के बंगरा चौपान का है. यहां के निवासी पीड़ित शंकर ठाकुर के मोबाइल पर बीते दिनों एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था. फोन करने वाले शातिर ने बेहद पेशेवर अंदाज में बात करते हुए खुद को एसबीआई क्रेडिट कार्ड ऑफिस का प्रतिनिधि (कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव) बताया. उसने पीड़ित से कहा कि उनके क्रेडिट कार्ड पर एक हेल्थ इंश्योरेंस एक्टिव है, जिसके नाम पर जल्द ही उनके खाते से एक बड़ी रकम कटने वाली है.

मोबाइल में डाउनलोड कराया रिमोट एक्सेस ऐप

जब पीड़ित ने इस चार्ज को रोकने और इंश्योरेंस बंद करने की बात कही, तो ठग ने उन्हें अपने झांसे में ले लिया. शातिर ने कहा कि इस चार्ज को तुरंत ब्लॉक करने के लिए उन्हें अपने मोबाइल में एक विशेष एप्लीकेशन डाउनलोड करनी होगी. पीड़ित उसकी बातों में आ गए और अपराधियों के बताए अनुसार एक संदिग्ध ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया. दरअसल, यह एक रिमोट एक्सेस ऐप था, जिससे अपराधियों को पीड़ित के मोबाइल की स्क्रीन और ओटीपी (OTP) का पूरा एक्सेस मिल गया.

आधे घंटे के भीतर खाली हो गया खाता

एप्लीकेशन डाउनलोड होने के महज आधे घंटे के भीतर ही खेल खत्म हो गया. पीड़ित के मोबाइल पर एक के बाद एक लगातार पैसे कटने के मैसेज आने लगे. जब तक शंकर ठाकुर कुछ समझ पाते और अपना कार्ड ब्लॉक करवाते, तब तक अपराधियों ने उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट से कुल 3 लाख 43 हजार 370 रुपये पार कर दिए थे. ठगी का अहसास होते ही उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके मामले की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है. पुलिस अब उस संदिग्ध ऐप, कॉल डिटेल्स और ट्रांजैक्शन आईडी के जरिए अपराधियों के सिंडिकेट तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.


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Author: Chandan

Published by: Sumit Kumar

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