नार्को टेरर नेटवर्क: दिल्ली क्राइम ब्रांच और असम पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में नार्को-टेरर नेटवर्क से जुड़े मुजफ्फरपुर निवासी अपूर्व ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद सनसनी फैल गई है. पूर्वोत्तर के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) के कैडरों के साथ अपूर्व के वित्तीय लेन-देन और नशीली दवाओं की आपूर्ति के सीधे संबंध उजागर हुए हैं. इसके बाद से मुजफ्फरपुर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पूरी तरह चौकन्नी हो गई हैं.
गांव में पसरा सन्नाटा, 2016 में गया था दिल्ली
रसूलपुर गांव निवासी अमरेन्द्र कुमार ठाकुर का पुत्र अपूर्व स्थानीय स्तर पर शांत स्वभाव का माना जाता था.
- वर्ष 2016 में दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद वह मुजफ्फरपुर छोड़कर दिल्ली चला गया था.
- उग्रवादी संगठन से जुड़ने और गिरफ्तारी की खबर मिलते ही उसके पैतृक गांव रसूलपुर में सन्नाटा पसर गया है.
- ग्रामीण हैरान हैं कि एक सीधा-सादा युवक इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा कैसे बन गया.
एमआर से नार्को नेटवर्क तक का सफर
जांच एजेंसियों के अनुसार अपूर्व ने वर्ष 2022 में दिल्ली में एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के रूप में काम शुरू किया था. इस दौरान उसने साइकोट्रोपिक दवाओं के अवैध बाजार की बारीकियों को समझा और जल्द अमीर बनने के चक्कर में कमीशन पर प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी में उतर गया.
स्थानीय कनेक्शन और फंडिंग की जांच तेज
अपूर्व की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय एजेंसियां और जिला पुलिस स्थानीय स्तर पर जांच में जुट गई हैं.
- पुलिस यह पता लगा रही है कि मुजफ्फरपुर या बिहार के अन्य जिलों के दवा कारोबारी इस गिरोह से जुड़े हैं या नहीं.
- उसके स्थानीय बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल की जा रही है.
- यह भी देखा जा रहा है कि दवा तस्करी से जुटाया गया पैसा उल्फा (आई) के आतंकी फंड में कैसे भेजा जाता था.
चार दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर असम ले गई टीम
असम के चराईदेव जिले की पुलिस टीम ने दिल्ली के नरेला में दबिश देकर उसे दबोचा. दिल्ली की अदालत से चार दिनों की ट्रांजिट रिमांड हासिल कर पुलिस उसे असम ले गई है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ जारी है.
ये भी पढ़ें: कुढ़नी में मंत्री के स्वागत के दौरान जदयू कार्यकर्ता के गले से 7 लाख की सोने की चेन चोरी
