दिघरा बंदर आतंक: मुजफ्फरपुर जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत दिघरा गांव में पिछले तीन दिनों से फैला खौफ आखिरकार समाप्त हो गया. वन विभाग की टीम ने छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आतंक का पर्याय बने एक आक्रामक बंदर को सफलतापूर्वक पिंजरे और जाल में कैद कर लिया. बंदर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली है. बीते तीन दिनों में इस आक्रामक बंदर ने करीब 20 ग्रामीणों पर जानलेवा हमला कर उन्हें काटकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था.
सरपंच की पहल पर गांव पहुंची वन विभाग की टीम
बंदर के लगातार हमलों से पूरे दिघरा गांव में दहशत का ऐसा आलम था कि बच्चे और बुजुर्ग घरों से बाहर निकलने में भी खौफ खा रहे थे.
- स्थानीय सरपंच चंदन कुमार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी.
- सूचना मिलते ही वन विभाग की विशेष रेस्क्यू टीम आवश्यक जाल और उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची.
- छतों और पेड़ों पर लगातार अपनी जगह बदल रहे बंदर को घेरने में कर्मियों को काफी पसीना बहाना पड़ा.
- करीब छह घंटे तक लगातार चले रेस्क्यू अभियान के बाद टीम ने बंदर को सुरक्षित काबू में कर लिया और उसे अपने साथ ले गई.
सदर अस्पताल में रेबीज का इंजेक्शन नदारद, बाहर से महंगे दामों में खरीदा
एक ओर जहां बंदर के पकड़े जाने से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर घायलों को स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का सामना करना पड़ा.
- बंदर के काटने से लहूलुहान हुए लगभग 20 ग्रामीण प्राथमिक उपचार और रेबीज की सुई लगवाने सदर अस्पताल पहुंचे.
- अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं थी.
- सरकारी अस्पताल से निराशा हाथ लगने के बाद मजबूरन तीमारदारों को बाहर की निजी दवा दुकानों से महंगे दामों पर रेबीज का इंजेक्शन खरीदना पड़ा.
- आक्रोशित परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही पर कड़ा रोष जताते हुए बुनियादी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की.
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