old pension scheme: बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला शाखा मुजफ्फरपुर के बैनर तले कर्मचारियों और शिक्षकों ने 1 सितंबर 2026 को पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पुनर्बहाली के लिए जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया. भोजनावकाश के दौरान आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए. प्रदर्शन के पश्चात संघ के जिला मंत्री के माध्यम से जिला पदाधिकारी को बिहार के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग-पत्र सौंपा गया.
एनपीएस लागू होने के दिन को बताया काला दिवस
कर्मचारी नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि 1 सितंबर 2005 को ही बिहार में पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई थी. कर्मचारी समुदाय इस तारीख को एक पीड़ादायक और काले दिन के रूप में याद करता है. उन्होंने एनपीएस को पूरी तरह बाजार आधारित व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसमें कर्मचारियों और सरकार के अंशदान के रूप में हजारों करोड़ रुपये जमा हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन की कोई निश्चितता नहीं है. कर्मचारियों का तर्क है कि चार दशक तक सेवा देने के बाद सम्मानजनक जीवन जीना उनका अधिकार है.
मांग-पत्र में उठाई गई मुख्य मांगें ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
- पेंशन फंड की वापसी: एनपीएस के तहत पेंशन फंड में जमा कर्मचारियों के 10 प्रतिशत अंशदान और राज्य सरकार के 14 प्रतिशत नियोक्ता अंशदान की पूरी राशि वापस बिहार सरकार के खाते में लाई जाए.
- पीएचआरडीए कानून वापसी: कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा की रक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा लागू पीएफआरडीए (PFRDA) कानून को समाप्त करने हेतु राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजे.
- ओपीएस की पुनर्बहाली: नई राष्ट्रीय पेंशन योजना को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर सभी राज्यकर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए.
प्रमुख नेताओं की रही मौजूदगी
इस विरोध प्रदर्शन में महासंघ के जिला मंत्री कृष्ण कुमार, जिलाध्यक्ष हरिनारायण सिंह, अतीन कुमार, मुकेश कुमार, सूरज कुमार, अमन कुमार, रवि कुमार, विकास कुमार, नीतू कुमारी, प्रियंका कुमारी, मनीष कुमार, सुषमा कुमारी, केशव झा, पूजा कुमारी, रणजीत कुमार सिंह, रविंद्र कुमार तिवारी, विजय कुमार सिंह और पंकज कुमार समेत कई अन्य कर्मचारी नेता और शिक्षक मौजूद रहे.
