Khageswarnath Dham Bandra: बूढ़ी गंडक और बागमती नदी की गोद में अवस्थित प्राचीन बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर में श्रावणी मेला को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं. जिला मुख्यालय से 28 किमी दूर बंदरा के मतलुपुर स्थित इस धाम को अब राजकीय मेले का दर्जा प्राप्त हो गया है. सावन के महीने में पहलेजा घाट से 110 किमी दूर पैदल जल लेकर आने वाले लाखों कांवरियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन और मंदिर न्यास समिति व्यापक प्रबंध कर रही है.
त्रेतायुगीन आस्था और ऐतिहासिक महत्व
मंदिर न्यास समिति के सचिव बैद्यनाथ पाठक के अनुसार इस मंदिर की मान्यता त्रेतायुग से जुड़ी है:
- प्रभु राम का आगमन: जनकपुर जाते समय भगवान राम ने इस स्वस्फुटित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी.
- गरुड़-कागभुसुंडी संवाद: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहीं गरुड़ जी के संशय का निवारण हुआ था.
- अद्भुत स्थापत्य कला: कसौटिया पत्थर का द्वार, खजुरिया ईंट और चंद्रकूप (कुआं) इसकी प्राचीनता को दर्शाते हैं.
राजकीय दर्जा मिलने के बाद भव्य स्तर पर आयोजन
वर्ष 2008 में धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन आए इस धाम में सांस्कृतिक विभाग की ओर से प्रत्येक सोमवारी को विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसे नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर विकसित करने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है.
सुरक्षा, स्वास्थ्य और व्यवस्था के कड़े इंतजाम
मेले के सुगम संचालन के लिए प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है:
- तोरणद्वार व पंडाल: मुख्य सड़क पर 6 तोरणद्वार और भव्य पंडाल बनाए जा रहे हैं.
- सुरक्षा व्यवस्था: पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और पुलिस बल तैनात रहेगा.
- मेडिकल टीम: सीएचसी बंदरा द्वारा शिफ्ट वाइज डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती कर दी गई है.
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