Muzaffarpur News: कांटी थाना क्षेत्र स्थित एक प्रतिष्ठित व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मैनेजर साइबर अपराधियों के 'फेविक्विक फ्रॉड' पैंतरे का शिकार बन गए. सदातपुर स्थित पहाड़पुर शनि मंदिर के सामने फोरलेन के किनारे लगे एक टाटा इंडिकैश एटीएम (ATM) मशीन पर ठगों ने इस वारदात को अंजाम दिया. जब तक मैनेजर कवीन्द्र कुमार को फ्रॉड का अंदाजा होता, तब तक प्रतिष्ठान के करेंट अकाउंट से अपराधियों ने कुल 85,000/- रुपये का फ्रॉड कर लिया था.
मोबाइल पर लगातार बजती रही मैसेज की घंटी, मैनेजर भौचक्का
जानकरी के अनुसार, प्रतिष्ठान के मालिक के मोबाइल पर रजिस्टर्ड अकाउंट से लगातार रकम कटने की सूचना मिल रही थी.
जब मालिक ने मैनेजर को इस बारे में टोका, तो मैनेजर कवीन्द्र कुमार भी भौचक्का रह गए. उन्होंने मालिक को बताया कि वे अभी एटीएम कार्ड को मशीन में डालकर केवल पिन नंबर और निकालने वाली रकम ही टाइप किए हैं, कोई निकासी नहीं हुई है.
एटीएम मशीन पर फेविक्विक, कैश शटर भी चिपकाया: फ्रॉड का शक गहराया
मालिक ने तुरंत एटीएम पर पहुँचकर छानबीन की, तो एटीएम मशीन के कार्ड स्लॉट और कैश निकलने वाली जगह पर फेविक्विक जैसा चिपचिपा पदार्थ गिरा देखा.
उन्हें फ्रॉड होने का गहरा शक हुआ. जब उन्होंने रकम निकलने वाली जगह के ढक्कन को खोलना चाहा, तो वह भी बुरी तरह चिपका हुआ था. इसके बाद पीड़ित ने तत्काल एटीएम कार्ड के टॉल फ्री नंबर पर कॉल कर कार्ड को ब्लॉक कराया. कार्ड निकालने का प्रयास करने पर वह नहीं निकला; दो लोगों द्वारा जोर लगाने पर भी कार्ड मशीन में ही फँसा रहा.
9 बार में उड़ाये 85 हजार, सुरक्षा गार्ड न होने से परेशानी
प्रतिष्ठान के मालिक ने बताया कि फ्रॉड करने वाले ने बड़ी चालाकी से 9 बार में करेंट अकाउंट से कुल 85,000/- रुपए की निकासी की है.
अपराधियों ने 8 बार में 10-10 हजार और अंतिम बार 5 हजार रुपए की निकासी कर अकाउंट साफ कर दिया. एटीएम मशीन पर कोई सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं रहने के कारण पीड़ित ने खुद को बेबस पाया और काफी परेशान हो गया.
साइबर टॉल फ्री और पुलिस से नहीं मिली त्वरित मदद, 2 दिन बाद दर्ज हुई शिकायत
थक-हार कर प्रतिष्ठान के मालिक ने साइबर टॉल फ्री नंबर 1930 पर फोन किया, लेकिन उधर से जबाव मिला कि वे सिर्फ कार्ड को ब्लॉक करवा सकते हैं, कोई शिकायत दर्ज नहीं कर सकते.
इसके बाद पीड़ित ने कांटी थाना को घटना की सूचना दी. थाना पुलिस ने भी डायल 112 की टीम को भेजकर औपचारिक जाँच करवाई, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि यह साइबर का मामला है, इसमें वे कोई और विशेष मदद नहीं कर सकते. दूसरे दिन पीड़ित द्वारा अपने दोनों मोबाइल नंबर से साइबर टॉल फ्री नंबर पर दर्जनों बार फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला. अंततः, दूसरे मोबाइल नंबर से फोन कर शिकायत बताई गई, जहाँ लगभग एक घंटा के सवाल-जवाब के बाद शिकायत दर्ज हो पाई.
