Statue Vandalism Condemned:पश्चिम बंगाल के रानीगंज में प्रकांड विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी महापंडित राहुल सांकृत्यायन की आदमकद प्रतिमा तोड़े जाने की एमसीपीआई (यू) ने कड़े शब्दों में निंदा की है.पार्टी के राज्य सचिव चंद्रमोहन प्रसाद ने इस घटना को असहिष्णुता का चरम उदाहरण बताते हुए रोष प्रकट किया.उन्होंने कहा कि वैचारिक भिन्नता के कारण किसी महापुरुष की प्रतिमा को नष्ट करना बेहद निंदनीय है.
1994 में स्थापित हुई थी प्रतिमा, ज्ञान और क्रांति के प्रतीक थे राहुल
यह प्रतिमा राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर वर्ष 1994 में रानीगंज में स्थापित की गई थी.भारत के ज्ञान और साहित्य में उनका अतुलनीय योगदान रहा है.उन्होंने सैकड़ों पुस्तकों की रचना की,आजादी की लड़ाई में जेल गए और किसानों-मजदूरों के अधिकारों के लिए लाठियां भी खाईं.उन्होंने तिब्बत जाकर दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह किया,जो आज भी पटना संग्रहालय में सुरक्षित हैं.
बिहार के स्वतंत्रता संग्राम से रहा गहरा नाता
राहुल सांकृत्यायन का बिहार से भी गहरा रिश्ता रहा.उन्होंने सिवान में किसान आंदोलन का नेतृत्व किया,गोपालगंज में 1948 में भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की और सारण के परसागढ़ मठ में संन्यासी बनकर रहे.
एमसीपीआई (यू) की मांग: जल्द पुनः स्थापित हो प्रतिमा
एमसीपीआई (यू) के राज्य सचिव चंद्रमोहन प्रसाद ने प्रशासन से मांग की है कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा को अविलंब उसी स्थान पर पूरी गरिमा के साथ पुनः स्थापित किया जाए.
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