मुजफ्फरपुर शिक्षक आरक्षण: बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा आयोजित शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (टीआरई-1, टीआरई-2 और टीआरई-3) में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों द्वारा आरक्षण कोटे का अनुचित लाभ उठाकर बहाल होने के मामले में शिक्षा विभाग ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. नियम के अनुसार केवल बिहार के मूल निवासियों को ही आरक्षण का लाभ दिया जाना था. इसके बावजूद बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेजों और गलत दावों के सहारे आरक्षित सीटों पर नियुक्तियां हासिल कर लीं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और शिक्षा विभाग, बिहार सरकार को लगातार मिल रहे परिवाद पत्रों के आलोक में अब जिले के सभी प्रखंडों व शहरी क्षेत्र के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से बाहर के शिक्षकों का पूरा ब्योरा तलब किया गया है.
तीन प्रखंडों से खुला फर्जीवाड़े का खेल
शुरुआती जांच में ही जिले के तीन प्रमुख प्रखंडों से आरक्षण के दुरुपयोग का बड़ा मामला उजागर हुआ है:
- नोटिस जारी: कुढ़नी, गायघाट और मुशहरी प्रखंड में अब तक दो दर्जन से अधिक शिक्षकों को चिह्नित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
- एक सप्ताह की मोहलत: सभी संबंधित शिक्षकों को सात दिनों के भीतर अपने साक्ष्यों के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया गया है.
- सेवा समाप्ति की चेतावनी: निर्धारित समय में संतोषजनक और साक्ष्य आधारित उत्तर न मिलने पर विधिक प्रक्रिया के तहत सेवा समाप्ति की अंतिम कार्रवाई की जाएगी.
सामान्य महिला और दिव्यांग कोटे में सबसे अधिक धांधली
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों द्वारा की गई प्राथमिक जांच में आरक्षण नियमों की गंभीर अनदेखी सामने आई है:
- महिला आरक्षण में हेराफेरी: सबसे अधिक नियुक्तियां सामान्य महिला आरक्षित कोटे के तहत पाई गई हैं, जबकि अभिलेखों के अनुसार वे अन्य राज्यों की मूल निवासी हैं.
- जाति व दिव्यांग कोटा: जातिगत आरक्षण और दिव्यांग श्रेणी के लिए सुरक्षित पदों पर भी दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है.
बीपीएससी और मुख्यालय से मांगा जाएगा मार्गदर्शन
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) प्रह्लाद गुप्ता ने बताया कि तीनों चरणों में बहाल हुए दूसरे राज्यों के सभी शिक्षकों की समेकित सूची तैयार की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग बीपीएससी और प्राथमिक शिक्षा निदेशालय से भी मार्गदर्शन मांगेगा कि आखिर किन परिस्थितियों में इन बाहरी अभ्यर्थियों का परिणाम आरक्षित श्रेणी में जारी किया गया. विभाग की इस कार्रवाई से फर्जीवाड़ा कर बहाल हुए शिक्षकों में भारी हड़कंप मचा हुआ है.
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