Muzaffarpur Ambulance Smuggling: जिंदगी बचाने वाली सरकारी व्यवस्था जब अपराध का सुरक्षित 'कवच' बन जाए, तो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो जाते हैं. उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) से व्यवस्था को झकझोर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां स्वास्थ्य विभाग की सरकारी एंबुलेंस की आड़ में पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर अपराध का काला साम्राज्य चलाया जा रहा था. मेडिकल थाना पुलिस ने जब आपातकालीन वाहन को घेरा, तो उसके भीतर से मरीजों की दवाओं की जगह लोडेड हथियार और भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ. पुलिस ने एंबुलेंस के चालक और मेडिकल टेक्नीशियन को रंगे हाथ दबोच लिया है.
आपातकालीन सुविधा के नाम पर प्रशासन को चकमा देने की साजिश
एंबुलेंस पर लगे लाल बत्ती और गूंजते साइरन का फायदा उठाकर शातिर अपराधी पुलिस नाकाबंदी को आसानी से पार कर रहे थे. मेडिकल थानाध्यक्ष पिंटू कुमार के नेतृत्व में हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक ने अस्पताल परिसर में चल रहे रैकेट का पर्दाफाश किया:
- गिरफ्तार सिंडिकेट: एंबुलेंस चालक सरबजीत कुमार और टेक्नीशियन मनोहर कुमार को हिरासत में लिया गया है.
- बरामदगी: वाहन के भीतर से अवैध लोडेड आग्नेयास्त्र (पिस्तौल) और करीब 200 ग्राम गांजे की खेप जब्त की गई.
अस्पताल से लेकर अपराध के गलियारों तक जांच की आंच
पुलिस अब इस पूरे नेक्सस की परतें उधेड़ने में जुट गई है. जांच के मुख्य बिंदु:
- आपातकालीन वाहन को अवैध गतिविधियों के लिए कब से 'सुरक्षित रूट' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था.
- बरामद लोडेड हथियार से किस बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की तैयारी थी.
- क्या अस्पताल प्रशासन के कुछ अन्य सफेदपोश और कर्मी भी इस काले धंधे में शामिल हैं.
सिस्टम की साख पर गहरा दाग
संवेदनशील मेडिकल व्यवस्था का इस्तेमाल जब हथियार और ड्रग्स तस्करी के लिए होने लगे, तो यह सुरक्षा तंत्र की घोर लापरवाही को उजागर करता है. पुलिस का दावा है कि आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ के बाद कई बड़े नामों का पर्दाफाश होना तय है.
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