मुजफ्फरपुर : कटरा में मुआवजा राशि को लेकर गतिरोध जारी है. इसका खामियाजा हाल के दिनों में बागमती बांध निर्माण के लिए वहां पहुंचे सर्वेक्षण दल को भुगतना पड़ा. मुआवजा भुगतान नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने टीम को न सिर्फ खदेड़ कर भगा ही दिया, बल्कि दुबारा आने पर जान से मार देने की धमकी भी दी.
बागमती प्रमंडल (रून्नीसैदपुर) के कार्यपालक अभियंता ने एसएसपी से बागमती बांध निर्माण और सर्वेक्षण दल के लिए सुरक्षा की मांग की है. एसएसपी को भेजे पत्र में कहा है कि सुरक्षा के बगैर बागमती तटबंध का काम करना संभव नहीं है. निर्माण और सर्वेक्षण टीम के साथ कभी भी अनहोनी घटना हो सकती है.
ऐसा पहले में भी हो चुका है. इसलिए टीम को सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराना जरूरी है. कटरा प्रखंड के अंतर्गत बागमती बांया तटबंध के किलोमीटर 81.94 से किलोमीटर 88.22 एवं दायें तटबंध के किलोमीटर 79.00 से 91.68 तक का बांध निर्माण का काम शुरू किया गया है. संवेदक को यह काम 24 महीने में पूरा करना है.
सहायक अभियंता व कनीय अभियंता की टीम बायें तटबंध के चनौली एवं मिश्रौली गांव के पास सर्वेक्षण कर रही थी. काम से वापस लौटने के दौरान चंदौली के लोगों ने टीम को रोक कर बहुत ही बुरा-भला कहा और मुआवजा भुगतान नहीं होने तक काम शुरू नहीं करने का दबाव दिया. साथ ही काम करने आने पर जान से मार देने की भी धमकी दी.
ग्रामीणों के इस रुख से प्रशासनिक हलके में हड़कंप है. तटबंध निर्माण का काम लटकने से कई मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी जिले के कई प्रखंडों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका व्यक्त की जा रही है. इसमें औराई, कटरा, गायघाट, मीनापुर सहित आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के बाढ़ग्रस्त होने की आशंका जतायी जा रही है.
एक हजार परिवारों काे अबतक नहीं मिली मुआवजा राशि :दस वर्षों से बाढ़ के दौरान बागमती परियोजना बांध के अंदर बसे हजारों परिवार करीब चार माह तक बाढ़ से प्रभावित रहते हैं. मुआवजा नहीं मिलने से परियोजना बांध के अंदर के ध्वस्त हो रहे मकान की मरम्मत भी नहीं करा रहे हैं.
इसको लेकर गत11 फरवरी को ग्रामीणों ने बकुची चौक पर धरना भी दिया था. धरना पर बैठे स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने वर्ष 2011 से परियोजना बांध के अंदर बसे लोगों की व्यथा वहां पहुंचे अधिकारियों से बतायी.
अधिकारियों को यह भी बताया कि कटरा प्रखंड के बकुची, पतारी, अंदामा, मोहनपुर, बसघट्टा, गंगेया, नवादा समेत अन्य गांवों के एक हजार से अधिक परिवार अब भी बाढ़ का दंश झेल रहे हैं. विभागों का चक्कर लगाने के बाद गंगेया, पतारी, नवादा व अंदामा गांव के कुछ विस्थापितों का भुगतान किया गया, लेकिन बकुची, बसघट्टा, मोहनपुर, अख्तियारपुर, नवादा गांव के करीब एक हजार परिवार मुआवजा की राशि से वंचित हैं.
पुनर्वास के लिए जमीन की व्यवस्था भी नहीं की जा सकी है.
सीतामढ़ी जिले की सीमा पर औराई प्रखंड
के भी कई गांवों के विस्थापित हैं परेशान
बागमती परियाेजना फेज दाे के निर्माण कार्य के कारण सीतामढ़ी जिले की सीमा पर स्थित औराई प्रखंड के अभिमानपुर से लेकर कटरा प्रखंड तक के विस्थापित परेशान हैं. दूसरे चरण में इस बांध का निर्माण 1309.63 कराेड़ की लागत से कटरा प्रखंड तक हाेने के बाद भी दाेनाें बांध के बीच आनेवाले तीन दर्जन गांवों के लाेगाें काे मुआवजा भुगतान के साथ ही बाहर बसने के लिए जमीन नहीं दी गयी है.
इसके कारण दाेनाें बांधाें के बीच से विस्थापित हाेने वाले प्रखंड के अभिमानपुर, सलेमपुर, चहुंटा, चैनपुर, मथुरापुर बुजुर्ग, मधुबन बेसी, भरथुआ, बसंत, मटिहानी, अतरार, चहुंटा, महराैली, महेशवाड़ा, कटरा प्रखंड के जाेकी खुर्द मथुरापुर, गंगुली, सुंदरखाैली, मथना उर्फ बसुआ, पिण्डाैली शंकर, माेहनुपर, उदयपुर, शिवदासपुर, बसाैथा उर्फ मेहसाैल, धनाैर, कटरा, माधाेपुर, साेनपुर, परमानंदपुर, हरपुर, जमालपुर काेदई, नवादा आदि गांव के लाेग परेशान हैं.
