दुकान लुटती देख यूट्यूब से बनायी गन सेफ्टी ग्रिप

मुजफ्फरपुर : अपने सामने गहनों की दुकान लुटती देखकर चार युवकों के मन में ऐसी बेचैनी जगी कि उन्होंने गन सेफ्टी ग्रिप बना डाली. चारों सहरसा, मोतिहारी और सीतामढ़ी के हैं. इनका चिप अब एनएसजी ट्रायल करेगी. सहरसा के सिद्धार्थ और जावेद मोतिहारी के विवेक व सीतामढ़ी के सुमन ने इस काम को अंजाम दिया.विवेक […]

मुजफ्फरपुर : अपने सामने गहनों की दुकान लुटती देखकर चार युवकों के मन में ऐसी बेचैनी जगी कि उन्होंने गन सेफ्टी ग्रिप बना डाली. चारों सहरसा, मोतिहारी और सीतामढ़ी के हैं. इनका चिप अब एनएसजी ट्रायल करेगी. सहरसा के सिद्धार्थ और जावेद मोतिहारी के विवेक व सीतामढ़ी के सुमन ने इस काम को अंजाम दिया.विवेक ने बताया कि एक बार वह सभी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके के एक गहनों की दुकान में बैठे थे.

तभी कुछ अपराधी वहां घुस आये और दुकान के गार्ड की ही बंदूक छीनकर वहां लूटपाट की. इस घटना को देखकर उनके मन में ऐसी चिप बनाने का ख्याल आया जो ऑटोमेटिक लॉक हो सकती है. इसके बाद यूट्यूब और गूगल सर्च कर ऐसी चिप बनाने की खोज में चारों जुट गये.

दो वर्ष और साढ़े सात लाख का खर्च आया. इस चिप को बनाने में दो वर्ष और साढ़े सात लाख का खर्च आया. विवेक ने बताया कि पैसे नहीं थे तो कई लोगों से कर्जदुकान लुटती देखभी लिये.कुछ जमीन भी बेची लेकिन इस प्रोजेक्ट को पूरा किया. अब प्राेजेक्ट पूरा हो गया है तो मन को तसल्ली है.

कैसे काम करता है यह लॉक

गन सेफ्टी लॉक एक चिप है. इसमें जीपीएस भी लगा हुआ है और यह मोबाइल से भी जुड़ा रहेगा. विवेक ने बताया कि इस ग्रिप की खासियत है कि यह किसी भी हथियार को लॉक कर सकता है. इसमें जीपीएस भी लगा हुआ है. अगर कोई हथियार को छेड़ता है तो उसकी सूचना मिल जाती है. इसके अलावा मोबाइल से जुड़े रहने से अगर बंदूक चोरी हो जाती है तो इसमें लगे इन वायस से हम चोर की बात सुन सकते हैं. ग्रिप फिंगरप्रिंट से अनलॉक होता है. इस ग्रिप का डिजाइन बीते अप्रैल महीने में पूरा हो गया था.

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