मुजफ्फरपुर : आंध्र प्रदेश से आने वाले मछली के आवक व भंडारण पर रोक को लेकर प्रशासन की ओर से नोटिस नहीं दिया गया है. ऐसे में हमलोग असमंजस में है. यह कहना है कहना है अहियापुर बाजार समिति स्थित थोक मछली मंडी के मछली विक्रेताओं का. बाजार समिति मंडी में मछली व्यवसायी संघ के सदस्यों ने इस मसले पर बुधवार को बैठक कर निर्णय लिया 18 तारीख को पटना में राज्य के सभी मछली व्यवसायी मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे.
जिसमें जिले से काफी संख्या में थोक व खुदरा मछली व्यवसायी पटना जाएंगे. संघ अध्यक्ष राम किशोर सिंह व सचिव संतोष कुमार सिन्हा ने बताया कि यहां से बीते रविवार को मछली का सैंपल कोलकाता जांच के लिए ले जाया गया है, जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आयी है.
फिलहाल पटना नगर निगम क्षेत्र में रोक लगी है. इस संबंध में यहां सरकार व प्रशासन की ओर से रोक के संबंध में कोई आदेश नहीं मिला, इसको लेकर संघ के सदस्यों ने पटना भी बात की तो पता चला कि ऐसा कोई आदेश नहीं है.
ऐसे में जब तक आदेश नहीं आता है हम सभी व्यापार करेंगे. चूंकि इससे सैकड़ों लोगों की जीविका जुड़ी हुई है. सुबह कुछ खुदरा व्यापारियों ने फोन पर बताया कि अफवाह से दुकान पर ग्राहक नहीं है और उन्हें पुलिस दुकान लगाने से परेशान कर रही है.
बाजार समिति से हर दिन 50 टन मछली का व्यापार
बाजार समिति में आंध्र प्रदेश व बंगाल से प्रतिदिन 50 टन मछली आता है. जिसकी कीमत करीब पचास लाख रुपये है. यहां पूरे उत्तर बिहार के जिलों में मछली की आपूर्ति होती है. शहर से लेकर गांव तक के खुदरा विक्रेता मछली बेचते है. लोकल मछली के उपेक्षा इसकी कीमत काफी कम है.
मछली कारोबार में दो हजार से अधिक लोग जुड़े हुए है. मछली व्यापारी का तर्क है कि सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए. बंगाल, आंध्र प्रदेश से दूसरे राज्यों में मछली जाता है.
वहां तो कोई रोक नहीं है. रोक का आदेश जारी होता है तो उसकी सूचना 15 दिन पूर्व देना चाहिए. बैठक में उमेश साह, संजय राय, पंकज राय, , सत्येंद्र सिंह, टुन्ना सिंह, पप्पू सिंह, दिलीप, पंकज सिंह, अभिषेक, लड्डु सिंह, सदरूल जमा, सहित दर्जनों की संख्या में मछली व्यवसायी मौजूद थे.
