चंदन सिंह, मुजफ्फरपुर : मुशहरी थानेदार की लापरवाही से दुष्कर्मी पीड़िता बच्ची के परिवार को पिछले आठ माह से मुआवजे की राशि के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं. 22 अप्रैल को थानाक्षेत्र के एक गांव में नौ वर्षीय बच्ची के साथ शराब के नशे में एक अधेड़ ने दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी थी. जिला प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में तीन लाख रुपये देने की घोषणा की गयी थी.
बीडीओ ने मुआवजे के लिए डीएम को नौ मई को ही प्रस्ताव भेज दिया था. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा सुनवाई के दिये आठ डेट में से एक भी डेट पर थानेदार उपस्थित नहीं हुए. इस कारण मुआवजे की राशि पीड़ित परिवार को नहीं मिल पा रही है. पीड़ित परिवार बीते आठ माह से जिला प्रशासन के पदाधिकारियों व थाने की चक्कर काट रहे हैं.
लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने थानेदार को किया नोटिस: थानेदार के लापरवाही को देखते हुए बिहार लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने उन्हें नोटिस किया है. इसमें बताया गया है पीड़ित परिवार को मुआवजे के लिए जो परिवाद दायर किया गया था.
इसकी सुनवाई को लेकर जितने भी डेट दिये गये, उस पर थानेदार अनुपस्थित रहें. इस पर पदाधिकारी ने खेद व्यक्त किया है. उसे चेतावनी दी है कि नियमानुसार पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के लिए प्रयास करें. इसको लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक को भी अपने स्तर से कार्रवाई करने को कहा गया है.
टीवी देखकर लौटते वक्त किया था दुष्कर्म, शव को 400 मीटर दूर गन्ने की खेत में फेंका : 22 अप्रैल की रात पीड़ित बच्ची आरोपित के घर टीवी देखने गयी थी. इसी दौरान आरोपित शराब पीकर घर लौटा. बच्ची को घर में अकेले देख वह उसे बहला-फुसलाकर गन्ने की खेत में ले गया था. दुष्कर्म के बाद गला दबा कर हत्या कर दी थी. पुलिस ने मौके पर मिले चुनौटी व कपड़े से उसकी गिरफ्तारी कर जेल भेजा था.
आठ माह में बदले गये दो थानेदार, तीसरे ने रविवार को थामी कमान
घटना के बाद से अबतक मुशहरी थाने के दो थानेदार बदल गये. जिस समय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या हुई थी, उस वक्त दारोगा विकास राय थानेदार के पद पर थे. उनके तबादले के बाद दारोगा रविशंकर सिंह को थाने की कमान मिली थी. रविवार को तीसरे थानेदार के रूप में दारोगा धर्मेंद्र कुमार ने चार्ज लिया है.
इधर, पुलिस का कहना है कि मुआवजा के लिए एफआइआर व चार्जशीट के साथ जिला विधिक प्राधिकार को अनुशंसा भेज दी गयी थी. मामला कल्याण विभाग में जाकर अटका पड़ा है.
