81 लाख लेकर बुजुर्गों को पूरा खाना तक नहीं मिला वृद्धाश्रम में

मुजफ्फरपुर : सेवा संकल्प समिति ने सरकार से 81 लाख रुपये लेकर भी बुजुर्गों को पूरा खाना तक नहीं दिया. सहारा वृद्धाश्रम को सामाजिक सुरक्षा कोषांग के तहत वर्ष 2014 से वर्ष 2018 तक 81 लाख रुपयों का आवंटन किया गया था. टिस ने भी अपनी रिपोर्ट में वृद्धाश्रम की व्यवस्था पर सवाल उठाये हैं. […]

मुजफ्फरपुर : सेवा संकल्प समिति ने सरकार से 81 लाख रुपये लेकर भी बुजुर्गों को पूरा खाना तक नहीं दिया. सहारा वृद्धाश्रम को सामाजिक सुरक्षा कोषांग के तहत वर्ष 2014 से वर्ष 2018 तक 81 लाख रुपयों का आवंटन किया गया था. टिस ने भी अपनी रिपोर्ट में वृद्धाश्रम की व्यवस्था पर सवाल उठाये हैं.
सेवा संकल्प समिति को वृद्धाश्रम का ठेका वर्ष 2014 में मिला था. पहले साल ही सरकार से एनजीओ को आठ लाख रुपये मिल गये. इन रुपयों से बुजुर्गों के लिए खाना, कपड़े, स्वास्थ्य और उनके लिए बिस्तर आदि की व्यवस्था करनी थी. लेकिन, आश्रम में बुजुर्गों को पूरा खाना भी नसीब नहीं होता था. वृद्धाश्रम बंद होने पर सेवा कुटीर लाये गये बुजुर्गों ने इसकी तस्दीक भी की.
बताया कि वहां उनके साथ मारपीट भी की जाती थी. बालिका गृह की तरह ही वृद्धाश्रम की जांच हर महीने की जानी थी, लेकिन यह जांच कागजी तौर पर की गयी. वहां रहने वाले लोगों का हाल कभी निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने नहीं की. सूत्रों के अनुसार वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की न कभी सेहत जांची गयी और न कपड़े दिये गये. सिर्फ जांच में सब ठीक बताया जाता रहा.
वृद्धाश्रम से गायब हो चुके हैं कई बुजुर्ग : सेवा संकल्प एवं विकास समिति की तरफ से चलने वाले सहारा वृद्धाश्रम से बुजुर्ग भी गायब हो चुके हैं. सेवा कुटीर लौट कर आये एक बुजुर्ग ने इसका खुलासा किया था. उन्होंने बताया कि बुजुर्ग के भागने पर उनकी कोई खोजबीन नहीं की गयी और मामले को रफा-दफा कर दिया गया. जांच में भी यह बात सामने नहीं आयी है.
टिस ने भी अपनी रिपोर्ट पर उठाये हैं सवाल: आॅडिट करने वाली संस्था टिस ने भी वृद्धाश्रम की व्यवस्था पर सवाल उठाये हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि बुजुर्गों के साथ वहां मारपीट तक की जाती है. वहां रहने की भी बेहतर व्यवस्था नहीं है. उन्हें खाना पीना भी मेन्यू के अनुसार नहीं मिलता था.

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