Hospital Fire case: मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रसाद हॉस्पिटल को खाली कराने के बाद उसके एक हिस्से को सील कर दिया गया है. जिले के कई अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की भी जांच की जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक 12 नर्सिंग होम को सील किया जा चुका है. जांच के दौरान निजी अस्पतालों में काम कर रहे सरकारी डॉक्टरों से जुड़ी कई जानकारियां भी सामने आई हैं. इसके बाद ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.
एसकेएमसीएच के आसपास अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई
जिला प्रशासन की स्पेशल टीम ने एसकेएमसीएच के आसपास कई नर्सिंग होम की जांच की. जांच के दौरान दर्जनभर नर्सिंग होम में अनियमितताएं मिलने पर उन्हें सील कर दिया गया.
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि प्रसाद हॉस्पिटल के एक हिस्से को भी सील किया गया है. मामले की जांच अभी जारी है. जल्द ही हॉस्पिटल प्रबंधन से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
प्रसाद हॉस्पिटल से जुड़े दस्तावेज पटना भेजे गए
स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने प्रसाद हॉस्पिटल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं. इसके बाद अस्पताल से संबंधित दस्तावेज पटना भेज दिए गए हैं.
मुख्यालय ने पूछा था कि अस्पताल में कुल कितने बेड रजिस्टर्ड थे. आईसीयू और सीसीयू में कितने बेड की अनुमति थी और घटना के समय वहां कितने मरीज भर्ती थे.
इसके अलावा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल का लाइसेंस कब बना था, इसकी जानकारी भी मांगी गई थी. स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट शनिवार को मुख्यालय को भेज दी.
अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट भी स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में पिछले वर्ष जुलाई महीने में मॉक ड्रिल भी कराई गई थी.
सरकारी डॉक्टर पर कार्रवाई, जांच कमेटी गठित
प्रसाद हॉस्पिटल में काम करने वाले एक सरकारी डॉक्टर को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है. सिविल सर्जन ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है.
जानकारी के अनुसार संबंधित डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगे हैं और उन्हें इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था. डॉक्टर वर्तमान में बंदरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित हैं. स्वास्थ्य विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि सरकारी सेवा में रहते हुए वे निजी अस्पताल में किस आधार पर काम कर रहे थे.
सूत्रों के अनुसार प्रसाद हॉस्पिटल में एसकेएमसीएच के कई डॉक्टर भी सेवाएं दे रहे थे. इनमें कुछ विभागाध्यक्ष स्तर के डॉक्टर भी शामिल बताए जा रहे हैं.
नर्सिंग कॉलेज भी जांच के दायरे में
अग्निकांड के बाद प्रसाद हॉस्पिटल से जुड़े नर्सिंग कॉलेज की भी जांच शुरू कर दी गई है. सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग कॉलेज से संबंधित सभी लाइसेंस और मान्यता से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है. यह भी जांच की जाएगी कि कॉलेज को कितनी सीटों की अनुमति मिली थी और वास्तव में कितने छात्रों का नामांकन किया गया.
विभाग को शिकायत मिली है कि कई बार निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों का दाखिला लिया गया. इसके अलावा कॉलेज के नवीनीकरण, अग्निशमन व्यवस्था और भवन के नक्शे की भी जांच होगी.
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कर्मचारियों ने बताई हादसे की पूरी कहानी
अग्निकांड के दौरान मौजूद अस्पताल कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं. कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बताया कि घटना वाले दिन अचानक तेज आवाज सुनाई दी.
उनके अनुसार कुछ ही देर में आईसीयू धुएं से भर गया और अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई. मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों के बीच चीख-पुकार शुरू हो गई और लोग जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे.
कर्मचारियों ने बताया कि सबसे पहले बेड मॉनिटर से आवाज आई थी. इसके बाद वहां से धुआं निकलना शुरू हुआ. धीरे-धीरे स्थिति गंभीर होती चली गई और पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घटना के समय मौजूद सभी कर्मचारियों से अलग-अलग बयान दर्ज किए हैं. इन बयानों के आधार पर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
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