बिहार में MBA की छात्रा को ढूंढने में CID के भी छूट रहे पसीने, 1 साल पहले हुआ था अपहरण, 50000 का रखा इनाम

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एमबीए की छात्रा को पिछले साल दिसंबर महीने में अगवा कर लिया गया था. अपहरण के इस केस की जांच आज भी जारी है. अब अदालत इस केस की निगरानी कर रही है. वहीं इस केस की जांच कर रही सीआइडी के भी अब पसीने छूट रहे हैं.

बिहार के मुजफ्फरपुर में मैनेजमेंट कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई कर रही छात्रा के अपहरण मामले की जांच एक साल बाद भी जारी है. छात्रा के लापता होने के बाद दर्ज अपहरण का मामला पुलिस से लेकर अदालत तक के लिए गुत्थी बन गयी है. दिसम्बर 2022 के इस मामले की मॉनीटरिंग हाइकोर्ट द्वारा की जा रही है. हाईकोर्ट ने हाल में ही इस अपहरणकांड को लेकर नाराजगी भी जतायी थी और पूछा गया था कि जब कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रही थी तो इसकी जांच सरकार ने सीआइडी को कैसे दे दिया. अपहृत लड़की के परिजन आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी बेटी शायद वापस अपने घर लौट आए. पुलिस ने उन्हें कुछ महीने पहले ये आश्वस्त किया था कि उनकी बेटी सुरक्षित है और जल्द ही उनके बीच वो होगी. लेकिन तमाम बातें हवा हवाई साबित हुई है. अब शहर से लेकर गांव तक पुलिस की ओर से माइकिंग करायी जा रही है. लड़की का पता बताने वाले को 50 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की जा चुकी है.

रेड लाइट एरिया में भी हुई छापेमारी

मुजफ्फरपुर स्थित एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट की छात्रा यशी सिंह पिछले साल 2022 के दिसंबर महीने से ही गायब है. मुजफ्फरपुर के भगवान पुरचौक से उसे अगवा किया गया था. युवती अपने ननिहाल में रहती थी और MBA की पढ़ाई कर रही थी. जानकारी के अनुसार, छात्रा तब डिप्रेशन में भी रहती थी. वहीं बीते एक साल के अंदर पुलिस से लेकर ईओयू तक मामले में हस्तक्षेप कर चुकी है. अब इस केस की जांच सीआइडी के डीएसपी कर रहे है.पुलिस ने इसी साल मई महीने में युवती की तलाश में रेड लाइट एरिया में भी ताबड़तोड़ छापेमारी की थी. लेकिन पुलिस के हाथ खाली ही रहे.

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माइकिंग के जरिए ढूंढ रही पुलिस,फेसबुक चलाने वाली महिला गिरफ्तार

एमबीए छात्रा अपहरण मामले मे पुलिस ने शहर में माइकिंग करायी है. लोगो को बताया कि युवती की सूचना देने पर पचास हजार का इनाम रखा गया है. वही सीआइडी ने दो महिलाओ को हिरासत मे लिया. उन दोनों को सदर थाने पर रखकर पूछताछ की गयी.अपहरण केस में पूछताछ के लिए थाने पर बुलायी गयी दोनों महिलाओं को पूछताछ के बाद वापस घर भेज दिया गया. बताया जाता है कि यह दोनो महिला वही है, जिसको सदर थाने की पुलिस ने बीते माह गिरफ्तार कर न्ययालय मे प्रस्तुत कर जेल भेजा था. एक सदर और दूसरी अहियापुर थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला है. सीआइडी की टीम ने दोनो महिलाओं से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की है कि आखिरकार अपहृत छात्रा की फेसबुक आइडी ये महिलाएं कैसे इस्तेमाल कर रहीं थीं. दोनों से पूछताछ के दौरान कोई ठोस सुराग नहीं मिलने की बात कही जा रही है. ना तो इस मामले में सदर थाने की पुलिस कुछ भी बोल पा रही है और ना ही सीआइडी के अधिकारी कुछ भी आधिकारिक रूप से बोल रहे हैं.

अदालत ने लगायी फटकार, दिसंबर में होगी सुनवाई

दरअसल, छात्रा के अपहरण के बाद उसकी बरामदगी अबतक नहीं होने पर दायर की गयी आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए पिछले दिनों हाइकोर्ट ने सरकार पर नाराजगी जाहिर की थी.कोर्ट ने सरकार से यह जानना चाहा कि जब इस मामले की निगरानी हाइकोर्ट द्वारा की जा रही है तो सरकार द्वारा कैसे इसकी जांच सीआइडी को दे दी गयी. जांच सीआइडी को देने के पहले हाइकोर्ट को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गयी. बता दें कि कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर को निर्धारित करते हुए सीआइडी के डीआइजी और मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे उस दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में भाग लेंगे. बता दें कि अपहृत छात्रा के नाना की ओर से पुलिस के पास शिकायत दर्ज करायी गयी थी. इस मामले में पुलिस और अब सीआइडी तक के हाथ खाली ही हैं. युवती का कोई अता-पता नहीं है.

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By Thakurshaktilochan sandilya

डिजिटल मीडिया का पत्रकार. प्रभात खबर डिजिटल की टीम में बिहार से जुड़ी खबरों पर काम करता हूं. प्रभात खबर में सफर की शुरुआत 2020 में हुई. कंटेंट राइटिंग और रिपोर्टिंग दोनों क्षेत्र में अपनी सेवा देता हूं.
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