टूटते रिश्ते व बिखरते परिवार को छांव प्रदान कर रही महिला थाना पुलिस

महिला थाना टूटते रिश्तों को जोड़ने के लिए एक अहम डोर बन चुकी है.

– 2025 में महिला थाना की काउंसलिंग के प्रयास से बचा 177 परिवार का उजड़ता हुआ घर

मुंगेर

छोटी सी बात बिगड़ जाए तो रिश्ते भी टूट जाते हैं. जरा सी नासमझी और स्वाभिमान की जिद में करीबी रिश्ते खास कर पति-पत्नी का रिश्ता झुलस रहे हैं. कुछ न्याय की आस में अदालत में हैं, तो कुछ मामले परिवार थाना पुलिस के पास पहुंच रहे है. लेकिन आज महिला थाना टूटते रिश्तों को जोड़ने के लिए एक अहम डोर बन चुकी है. एक तरफ जहां काउंसलिंग के माध्यम से रिश्तों को जोड़ कर घर बसाने का काम कर रही है, वहीं दूरी ओर महिला उत्पीड़न से बाज नहीं आने वाले जिद्दी रिश्तेदारों को जेल भेजने से भी गुरेज नहीं कर रही है.

महिला थाना की काउंसलिंग से बची 177 परिवार के बिखरते रिश्ते

महिला थाना की काउंसलिंग के प्रयास से एक वर्ष में 177 परिवार के टूटते और बिखतरे रिश्तों को बचाने का काम किया. यानी महिला थाना पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजने से अधिक रिश्तों को जोड़ने में विश्वास करती है. हर महीने 15 से 20 आवेदन महिला थाना पहुंच रही है. इसमें छोटी-छोटी बात पर पति-पत्नी के बीच मन मुटाव के अलावा दहेज उत्पीड़न के आरोप होते हैं. जबकि कहीं सास और ननद तो कहीं देवर के बीच मन मुटाव के आरोप होते है. जनवरी से लेकर दिसंबर 2025 में कुल 228 आवेदन महिला थाना को प्राप्त हुआ. जिसमें 177 आवेदनों का निष्पादन थाना स्तर पर पति-पत्नी और परिवार को बैठा कर काउंसलिंग कर सुलझा लिया गया. जबकि 51 आवेदनों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी. अधिकांश मामलों में आरोपी को महिला थाना पुलिस पकड़ कर जेल भेज चुकी है. इतना ही नहीं जनवरी 2026 में कुल 12 आवेदन महिला थाना को प्राप्त हुए. जिसमें 10 मामलों का काउंसलिंग के माध्यम से निष्पादन करवा दिया गया. जबकि एक में जीरो एफआईआर किया गया है और एक का जांच चल रहा है.

सुलह-समझौते का होता है प्रयास

महिला थाना की थानाध्यक्ष कृति कुमारी ने बताया कि महिला उत्पीड़न से जुड़े प्रार्थना पत्र आते हैं, लेकिन हमलोग सबसे पहले दोनों पक्षों की काउंसलिंग करते हैं. फिर सुलह-समझौते का प्रयास किया जाता है, ताकि कानूनी कार्रवाई के चक्कर में रिश्ता खराब न हो जाए. उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के बाद भी बात नहीं बनने पर महिला के प्रार्थना पत्र के आधार प्राथमिकी दर्ज की जाती है और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने का काम किया जाता है.

कहते हैं पुलिस अधीक्षक

पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि महिला थाने में अधिकतर पारिवारिक विवाद आते हैं, तो घरेलू पारिवारिक विवाद जिसमें पति-पत्नी के बीच अनबन या अन्य इशू होते हैं. इसमें नियमानुसार पहले दोनों पक्षों को बैठा करके समझाया बुझाया जाता है. इसी क्रम में जोड़ों को मिलवाया जाता है. उनके बीच जो कमियां रहती हैं, उनके बीच जिस वजह से अनबन या समस्या उत्पन्न होती है, उनको दूर कराने का हमारे महिला थाने के कर्मियों द्वारा कोशिश किया जाता है. उन्होंने कहा कि सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क कार्यरत है. वहां भी मामलों को सुलझाया जाता है.

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