सूची में गड़बड़ियों ने बढ़ायी चिंता, कई वर्षों से एक ही जिले में जमे कर्मियों पर उठे सवाल
मुंगेर. स्वास्थ्य विभाग के लिपिकीय सेवा संवर्ग के 2814 लिपिकों की औपबंधिक वरीयता सूची जारी होते ही जिले में हड़कंप मच गया है. इस सूची के आधार पर मुंगेर जिले के 50 से अधिक लिपिकों का तबादला तय माना जा रहा है. सूचना मिलते ही कई लिपिक अपने तबादले को रुकवाने के लिए विभागीय स्तर पर जुगाड़ में जुट गये हैं. सूची के विश्लेषण से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. जिले में कार्यरत करीब 100 लिपिकों में कई वर्षों से अपने गृह जिला मुंगेर में ही जमे हुए हैं. इनमें से कई ने केवल एक प्रखंड से दूसरे प्रखंड में स्थानांतरण कराकर विभागीय नियमों से बचने का रास्ता निकाल लिया है. अकेले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धरहरा में ही छह से अधिक लिपिक वर्षों से पदस्थापित हैं. सूची के अनुसार 41 लिपिक ऐसे हैं, जो मुंगेर मुख्यालय के एक ही कार्यालय से दूसरे कार्यालय में लगातार बने हुए हैं. इससे स्थानांतरण नीति की पारदर्शिता व निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं.सूची में दर्ज विवरणों में भी कई विसंगतियां सामने आयी हैं. उदाहरण के तौर पर क्रम संख्या 278 पर गीता कुमारी का नाम दर्ज है, जिनकी जन्मतिथि 23 अप्रैल 1975, नियुक्ति तिथि एक दिसंबर 1993 व सेवानिवृत्ति तिथि 30 अप्रैल 2035 दर्शायी गयी है, लेकिन वे वर्तमान में किस कार्यालय में कार्यरत हैं, इसका उल्लेख नहीं किया गया है. इसी प्रकार क्रम संख्या 1894 पर चंदन कुमार का नाम है, जिनकी जन्मतिथि 16 अप्रैल 1997 व नियुक्ति तिथि आठ फरवरी 2016 दर्ज है. हालांकि कार्यस्थल के कॉलम में केवल अर्बन लिखकर छोड़ दिया गया है, जिससे सूची की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं धरहरा प्रखंड के लिपिक अमरदीप कुमार (क्रम संख्या 1510) के बाद 1511 व 1512 पर क्रमशः नंदनी कुमारी व सुबोध कुमार का नाम एक ही क्रम में दर्ज होना भी कई तरह की शंकाएं उत्पन्न कर रहा है.
वरीयता सूची में सामने आयी इन खामियों को लेकर लिपिकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अब सभी की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं कि इन त्रुटियों को किस प्रकार सुधारा जाता है व संभावित तबादलों पर क्या निर्णय लिया जाता है.