उग हे सूरज देव भइया अरघ के बेरिया… गीतों से गुलजार हो रहे गली-मुहल्ले

महापर्व छठ के आरंभ होते ही पूरा क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में रंग उठा है. घर-घर में छठ मइया के गीतों की मधुर गूंज से वातावरण पवित्र हो गया है.

हवेली खड़गपुर. महापर्व छठ के आरंभ होते ही पूरा क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में रंग उठा है. घर-घर में छठ मइया के गीतों की मधुर गूंज से वातावरण पवित्र हो गया है. भोजपुरी लोक संस्कृति की पहचान शारदा सिन्हा, भक्ति संगीत की प्रसिद्ध गायिका देवी और सुर साम्राज्ञी अनुराधा पौडवाल के पारंपरिक गीतों ने आस्था का ऐसा जादू बिखेरा है कि नगर का कोना-कोना महापर्व छठ की भक्ति में लोगों को डूबो दिया है. सुबह से ही महिलाओं ने स्नान कर सात्विक भोजन बनाकर नहाए-खाए की परंपरा निभायी. व्रतियों ने शुद्धता और नियमों का पालन करते हुए कद्दू-भात बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण की और व्रत का संकल्प लिया. वहीं घरों, गलियों और घाटों पर केलवा जे फरेला घवद से ओ धनुष बांधल रहब हो…, उग हे सूरज देव भइया अरघ के बेरिया… और पटना के घाटे पे अइले छठी मइया… जैसे पारंपरिक गीतों की मधुर स्वर लहरियां से वातावरण भक्तिमय हो उठा है. नगर के विभिन्न चौक-चौराहों पर लगे लाउडस्पीकरों से छठ संगीत की गूंज सुनायी दे रही है. महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में घाट सजाने और पूजा सामग्री तैयार करने में जुटी है. बच्चे और युवा भी गीतों की धुन पर झूमते नजर आ रहे हैं. नगर परिषद और सामाजिक संस्थाओं द्वारा घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा की विशेष तैयारी की जा रही है. श्रद्धालुओं का कहना है कि शारदा सिन्हा के बिना छठ अधूरा लगता है. सूर्योपासना के इस महापर्व में भक्ति, लोकसंस्कृति और आस्था का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है कि पूरा क्षेत्र छठ मइया की जय के जयघोष से गूंज उठा है.

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Published by: Anand kumar

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