श्रावणी मेले से पहले ही शिवमय हुआ असरगंज: कोलकाता के शिवभक्तों का अनूठा जत्था रवाना

मुंगेर जिले की सीमा से कांवड़ पथ पर कोलकाता से आए शिवभक्तों का एक भव्य जत्था गुजरा, जो अर्धनारीश्वर शिव-पार्वती की प्रतिमा से सजी कांवर लेकर चल रहे थे. कांवरियों ने मेले की अधूरी तैयारियों पर चिंता जताई है.

मुंगेर जिले की सीमा से प्रारंभ होने वाले कच्ची कांवरिया पथ कमराय (असरगंज) से मंगलवार को कोलकाता के प्रसिद्ध तारकेश्वर नाथ धाम से आए शिवभक्तों का एक भव्य जत्था गुजरा. कंधे पर अर्धनारीश्वर शिव-पार्वती की आकर्षक प्रतिमा से सजी कांवर लेकर आगे बढ़ते इन कांवरियों के "बोल-बम" और "हर-हर महादेव" के जयकारों से पूरा इलाका शिवमय हो उठा. हालांकि, कांवरियों ने देवघर मार्ग पर मेला प्रशासन की तैयारियों को लेकर कुछ अधूरी व्यवस्थाओं पर चिंता भी जताई है.

अर्धनारीश्वर स्वरूप की भव्य कांवर बनी आकर्षण का केंद्र

कच्ची कांवरिया पथ पर पहली बार गुजर रहा यह जत्था आम राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र रहा:

  • अद्भुत बनावट: शिवभक्त अपने कंधे पर भगवान शिव और माता पार्वती के अर्धनारीश्वर स्वरूप की विशाल एवं सुंदर प्रतिमा से सजी कांवर लेकर चल रहे थे.
  • पारंपरिक साज-सज्जा: कांवर के दोनों छोर पर लाल वस्त्रों में बंधे गंगाजल के पवित्र कलश लटक रहे थे, जबकि बीच-बीच में बंधी छोटी-छोटी घंटियों की मधुर ध्वनि पूरे वातावरण को गुंजायमान कर रही थी.

प्रशासन की सुस्त तैयारियों पर कांवरियों ने उठाए सवाल

यात्रा के दौरान कोलकाता (पश्चिम बंगाल) से आए तारकनाथ के वरिष्ठ कांवरिया आशीष बॉस एवं स्वप्न दा ने मार्ग की व्यवस्थाओं पर अपना अनुभव साझा किया:

  1. कार्य अब भी जारी: कांवरियों का कहना है कि श्रावणी मेले के आयोजन में अब बेहद कम समय बचा है, लेकिन प्रशासन की तैयारियां अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं.
  2. बुनियादी सुविधाओं की दरकार: वर्तमान में कावरिया पथ पर पेयजल (शुद्ध पानी), शौचालय और आकस्मिक चिकित्सा शिविरों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसे और तेजी से पूरा करने की जरूरत है ताकि असमय आने वाले भक्तों को कष्ट न हो.

स्थानीय बाजार में लौटने लगी रौनक

कांवरियों के शुरुआती जत्थों के आगमन से न केवल क्षेत्र का आध्यात्मिक माहौल बदला है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलने लगा है:

हर साल श्रावण मास की आहट होते ही पूरे असरगंज और कमराय क्षेत्र का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है. कांवरियों के आने से मार्ग के किनारे सजने वाली दुकानों, फल विक्रेताओं और होटल कारोबारियों के चेहरे खिल उठते हैं. इस बार भी शुरुआती दौर में ही भारी संख्या में भक्तों का आना शुभ संकेत है. बोल-बम के नारों से पूरा बाजार गूंज रहा है.


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