संग्रामपुर. सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को नगर पंचायत का दर्जा देकर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. नगर पंचायत के गठन के तीन वर्ष बाद भी संग्रामपुर मुख्यालय में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है और नगरवासी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. लोगों को बेहतर सड़क, नाली, शुद्ध पेयजल एवं रौशनी की समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है. संग्रामपुर नगर पंचायत का वार्ड संख्या 6 और 7 की स्थिति इन दिनों विकास की दावों की पोल खोल रही है. सड़क पर सालों भर बहता गंदा पानी और जलजमाव के कारण स्थानीय लोगों का जीवन नारकीय बना हुआ है. लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़क पर बह रहा है, जिससे पूरी गली कीचड़ में तब्दील हो चुकी है. सड़क की बदहाल स्थिति के कारण राहगीरों को हर समय फिसलकर गिरने और दुर्घटना का भय बना रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक इसके समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है. जबकि इसी गली में कन्या मध्य विद्यालय संग्रामपुर है और प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी कीचड़ भरे रास्ते से होकर विद्यालय जाती है. इसके अलावा गली में स्थित मौन महादेव मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्थानीय निवासियों केशव कुमार, शंकर कुमार, मनोहर यादव, रजनी देवी ने बताया कि नगर पंचायत बनने के बाद उम्मीद थी कि यहां नाली और सड़क का निर्माण कराया जाएगा तथा वर्षों पुरानी जल निकासी की समस्या का समाधान होगा. लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो पक्की नाली का निर्माण हो सका और न ही सड़क की स्थिति में कोई सुधार हुआ. संग्रामपुर नगर पंचायत का वार्ड संख्या 6 और 7 की स्थिति इन दिनों विकास की दावों की पोल खोल रही है. सड़क पर सालों भर बहता गंदा पानी और जलजमाव के कारण स्थानीय लोगों का जीवन नारकीय बना हुआ है. लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़क पर बह रहा है, जिससे पूरी गली कीचड़ में तब्दील हो चुकी है. सड़क की बदहाल स्थिति के कारण राहगीरों को हर समय फिसलकर गिरने और दुर्घटना का भय बना रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक इसके समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है. जबकि इसी गली में कन्या मध्य विद्यालय संग्रामपुर है और प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी कीचड़ भरे रास्ते से होकर विद्यालय जाती है. इसके अलावा गली में स्थित मौन महादेव मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्थानीय निवासियों केशव कुमार, शंकर कुमार, मनोहर यादव, रजनी देवी ने बताया कि नगर पंचायत बनने के बाद उम्मीद थी कि यहां नाली और सड़क का निर्माण कराया जाएगा तथा वर्षों पुरानी जल निकासी की समस्या का समाधान होगा. लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो पक्की नाली का निर्माण हो सका और न ही सड़क की स्थिति में कोई सुधार हुआ.
नगर पंचायत गठन के तीन वर्ष बाद भी नहीं बदली संग्रामपुर की तस्वीर
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को नगर पंचायत का दर्जा देकर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
