परिवार में सुख शान्ति व विकास में ऋषियों के विचार आज भी प्रासंगिक : प्रो. गिरीश चंद्र पंत
किसी भी समाज अथवा राष्ट्र की उन्नति उसके परिवार पर ही निर्भर करती है. परिवार में सुख शान्ति और विकास के लिए ऋषियों के विचार आज भी प्रासंगिक हैं
मुंगेर.
किसी भी समाज अथवा राष्ट्र की उन्नति उसके परिवार पर ही निर्भर करती है. परिवार में सुख शान्ति और विकास के लिए ऋषियों के विचार आज भी प्रासंगिक हैं. वेदों में अनेक ऐसे मंत्र हैं जो परिवार प्रबन्धन का सूत्र प्रदान करते हैं. रामायण और महाभारत का चिन्तन हमारे परिवारों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए आज भी महत्त्वपूर्ण है. उक्त बातें जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली के संस्कृत विभाग के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.(डॉ ) गिरीश चंद्र पंत ने मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग व आरडी एंड डीजे कॉलेज, मुंगेर के संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “संस्कृत वाङ्मय में परिवार प्रबंधन ” विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में कही. समारोह में मुंंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार ने कहा कि परिवार में संवादहीनता नहीं होनी चाहिए. पारस्परिक सहयोग और सदाशयता से ही परिवार का विकास होता है. विभाग के पूर्व प्राध्यापक प्रो. लक्ष्मीश्वर झा ने कहा महाविद्यालय का संस्कृत विभाग का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है. इस संगोष्ठी का आरम्भ केशव, लोकेश, गजेन्द्र, शुभम एवं अभिज्ञान द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया.
संस्कृत विभागीय छात्रों द्वारा भव्य एवं भावपूर्ण गंगा आरती एवं शंखनाद ने उद्घाटन समारोह के संपूर्ण वातारण को आध्यात्मिक बना दिया. कार्यक्रम में अतिथियों का औपचारिक स्वागत भाषण संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ० विश्वजीत विद्यालंकार द्वारा प्रस्तुत किया गया. उद्घाटन सत्र का संचालन संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ० कृपाशंकर पाण्डेय कर रहे थे. सारस्वत अतिथि के रूप में भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीश्वर झा, प्रो. मोहन मिश्र, जॉइंट कमिश्नर विजय कुमार झा, प्रो० निभा शर्मा, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मी नारायण, बिहार विश्वविद्यालय से प्रो. ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री, कानपुर से डॉ० संध्या ठाकुर एवं इनके साथ देशभर से लगभग 10 पूर्ववर्ती छात्र- छात्रा एलुमनी इस ज्ञानयज्ञ में उपस्थित रहे.