मुंगेर. संतान-पालन व पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए कृषि, उद्योग व उत्तम परंपराओं के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है. आज के दौर में भी इसकी प्रासंगिकता कम नहीं हुई है. आवश्यकता इस बात की है कि महिलाओं के योगदान का सही आकलन करते हुए उन्हें जागरूक, शिक्षित और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जाए. ये बातें सोमवार को जेआरएस कॉलेज, जमालपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि बीआरएम कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य प्रो. निर्मला कुमारी ने कहीं. कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ दीप प्रज्वलन, एनएसएस गीत और सरस्वती वंदना के साथ हुआ.
विचार गोष्ठी का विषय : नारी सशक्तिकरण और विकसित भारत 2047
इस विशेष संगोष्ठी का विषय ””नारी सशक्तिकरण और विकसित भारत 2047”” रखा गया था. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो देवराज सुमन ने की, जबकि संचालन एनएसएस पीओ डॉ राजेश कुमार सिंह द्वारा किया गया. विशिष्ट अतिथि के रूप में अर्थशास्त्र की शिक्षिका डॉ कंचन कुमारी एवं डीजे कॉलेज की डॉ ज्योति कुमारी उपस्थित रहीं. मुख्य वक्ता के रूप में कुलानुशासक डॉ जयंत कुमार तथा पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो भवेशचंद्र पांडेय ने अपने विचार रखे.
अबला नहीं सबला है नारी, हर क्षेत्र में भागीदारी जरूरी
हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ सुनील कुमार ने प्राचीन व मध्यकालीन भारत की सशक्त महिलाओं का उदाहरण देते हुए वर्तमान परिदृश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि नारी अबला नहीं, बल्कि सबला है. देश के विकास के लिए हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी अनिवार्य है. कॉलेज की सहायक प्राध्यापिका डॉ पूजा, डॉ मांडवी व डॉ साबिहा ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब महिलाएं जागरूक होंगी और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचेगा.
आर्थिक मजबूती और स्टार्टअप पर चर्चा
विशिष्ट अतिथियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था का खाका पेश करते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, खेल व स्टार्टअप के क्षेत्र में बजट में विशेष स्थान मिलना चाहिए. उन्होंने महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक स्थिति के आंकड़ों को गंभीरता से प्रस्तुत किया. वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि सशक्तिकरण का अर्थ समानता से है. कोई किसी से कम या ऊपर नहीं है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि सशक्तिकरण के प्रवाह में हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक पहचान प्रभावित न हो.
महिला सशक्तिकरण सूचकांक पर शोध की जरूरत
धन्यवाद ज्ञापन के दौरान गणित विभागाध्यक्ष डॉ अमर कुमार ने अपने शोध के हवाले से डब्लूईआइ (वुमन एम्पावरमेंट इंडेक्स) पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि विश्व सूचकांक की तुलना में भारत में नारियों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए इस क्षेत्र में व अधिक शोध की आवश्यकता है. इस अवसर पर राजा कुमार, डॉ अमरेंद्र कुमार, डॉ सागर सरकार, डॉ निर्मल, डॉ अबरार, वैष्णवी कुमारी, आस्था, पूजा कुमारी सहित कई गणमान्य लोग व छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
—————————संविधान से मिले बराबरी के अधिकार ने बदली महिलाओं की स्थिति, संघर्षों से मिली आज की पहचान
फोटो कैप्शन – 5. सेमिनार को संबोधित करती छात्रामुंगेर. बीआरएम महिला कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ””वर्तमान में महिलाओं की स्थिति”” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी के माध्यम से वक्ताओं ने महिलाओं के ऐतिहासिक संघर्ष और वर्तमान उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ वंदना कुमारी ने की.
संविधान व संघर्ष सशक्तिकरण की मुख्य आधारशिला
मुख्य वक्ता के रूप में जमालपुर कॉलेज, जमालपुर के हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ चंदा कुमारी ने शिरकत की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज महिलाएं जिस बेहतर स्थिति में हैं, वह उनके लंबे संघर्षों का परिणाम है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सब इसलिए संभव हो सका क्योंकि भारतीय संविधान ने देश के सभी नागरिकों को बराबरी का सम्मान व अधिकार दिया है. इसी संवैधानिक सुरक्षा ने महिलाओं के लिए प्रगति के द्वार खोले हैं.
प्रगतिशील पुरुषों के योगदान को किया गया याद
अध्यक्षता कर रही डॉ वंदना कुमारी ने कहा कि महिलाओं की वर्तमान उन्नति में प्रगतिशील विचार वाले पुरुषों का अतुलनीय योगदान रहा है. उन्होंने डॉ भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के विचारों को याद करते हुए कहा कि इनके प्रयासों के बिना नारी सशक्तिकरण की राह इतनी आसान नहीं होती.
भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ कुमारी नेहा ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति हमेशा तत्पर व जागरूक रहने की आवश्यकता है. वहीं जीव विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ शोभा राज और रसायनशास्त्र विभाग की डॉ वैशाली आनंद ने संयुक्त रूप से कहा कि आज महिलाओं के पास जो भी अधिकार हैं, वे सदियों के कड़े संघर्ष के बाद हासिल हुए हैं. सेमिनार के दौरान वनस्पति शास्त्र के डॉ. संदीप टाटा, इतिहास विभाग के डॉ. श्याम कुमार, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. जैन शम्शी और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अभय कुमार ने भी विषय पर अपनी राय रखी. शोधार्थी अर्चना कुमारी और पीजी सेमेस्टर-1 की छात्रा निराली राज ने भी अपने विचार साझा किए. इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार, डॉ. संगीता कुमारी, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ. सुहली सरकार, डॉ. रामरेखा कुमार और छात्रा तानिया अग्रवाल सहित कॉलेज की कई अन्य छात्राएं व शिक्षक उपस्थित थे.