बदहाल है राजा तालाब, मत्स्य पालन पर लगा ग्रहण

प्रशासनिक महकमा के नाक के नीचे के तालाब के जीर्णोद्धार की दिशा में नहीं उठाया जा रहा कोई खास कदम

गंदगी और गाद से पटा है चार एकड़ में फैला राजा तालाब, बारिश का कर रहा इंतजार

मुंगेर. किला परिसर में स्थित मत्स्य विभाग कार्यालय के समीप राजा तालाब रखरखाव के अभाव बदहाली के कगार पर पहुंच गया है. चार एकड़ में फैला यह तालाब गाद और गंदगी से पटा हुआ है. पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण अभी ही सूखने की स्थिति में पहुंच गया है. इसके कारण मछली पालन पर भी ग्रहण लग गया है. प्रशासनिक महकमा के नाक के नीचे के इस तालाब के जीर्णोद्धार की दिशा में कोई खास कदम नहीं उठाया जा रहा है.

चार एकड़ में फैला है तालाब, झेल रहा बदहाली का दंश

बताया जाता है कि जिला मत्स्य कार्यालय के पास राजा तालाब है. जो चार एकड़ में फैला हुआ है और गंगा तट पर अवस्थित है. इसका निर्माण कब और किसने किया, इसकी सटीक जानकारी नहीं मिली. लेकिन यह तालाब 100 साला पुराना है. विगत 20 वर्षों में लाखों-करोड़ों रुपये तालाब पर खर्च कर दिये गये, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह तालाब अपना अतीत और वर्तमान दोनों खोता जा रहा है. सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकार जल-जीवन-हरियाली मिशन चला कर जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए तालाबों के जीर्णोद्धार कार्यक्रम चला रही है. ठीक इस तालाब के सामने करोड़ों रुपये की लागत से रानी तालाब (राजा-रानी तालाब) का जीर्णोद्धार किया गया, जो आज लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र है. लेकिन राजा तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. और बारिश आने का इंतजार कर रहा है. तालाब में पानी रहे इसके लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है. तालाब गंदगी से पटा हुआ है और इसमें गाद भरा हुआ है.

मछली पालन पर लगा ग्रहण, सहयोग समितियां परेशान

यह तालाब मत्स्य विभाग के अधीन है, जिसकी बंदोबस्ती भी की जाती है. वर्तमान में एक मत्स्यजीवी सहयोग समिति को यह तालाब पट्टा पर दिया गया है. नाम नहीं छापने की शर्त पर उक्त समिति के एक सदस्य ने बताया कि इसकी बंदोबस्ती सिर्फ दबाव में ली जाती है, ताकि विभाग की प्रतिष्ठा बची रहे. बारिश में जब इसमें पानी भरता है तो हमलोग इसमें मछली का जीरा ( बिछरा ) भी गिराते है, लेकिन जीरा का भी दाम भी निकलना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि तालाब की जो स्थिति है, वह मछली पालन के योग्य नहीं है. तालाब में पानी रहे. इसकी कोई व्यवस्था नहीं है.

कहते हैं मत्स्य पदाधिकारी

जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष रस्तोगी ने बताया कि तालाब के जीर्णोद्धार व सालो भर इसमें पानी रहे इसको लेकर प्रयास किया जा रहा है. शीघ्र ही ठोस निदान निकला जायेगा, ताकि तालाब अपने स्वरूप में रहे और बड़े पैमाने पर मछली पालन हो सके. वर्तमान में मत्स्यजीवी सहयोग समिति के नाम बंदोस्ती है.

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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