मुंगेर जिले में गंगा नदी के जलस्तर में उतार तो शुरू हो गया है, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी सुस्त है कि बाढ़ पीड़ितों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, शनिवार सुबह तक गंगा का जलस्तर खतरे के निशान (39.33 मीटर) से 29 सेंटीमीटर ऊपर 39.62 मीटर पर टिका रहा.
रातभर में महज 4 सेंटीमीटर पानी घटने के कारण दियारा और निचले इलाकों में अभी भी सैलाब का पहरा है. घर डूबने के बाद ऊंचे ठिकानों पर शरण लिए परिवारों की मुश्किलें तब दोगुनी हो जाती हैं, जब आसमान से बारिश की बूंदें बरसने लगती हैं.
डीएम ऑफिस के सामने पार्क में जिंदगी: भीगी लकड़ियां और चूल्हे की जद्दोजहद
जिलाधिकारी कार्यालय के सामने स्थित पार्क में गंगा पार सीता चरण से आए दर्जनों परिवार प्लास्टिक की पन्नियों (पॉलीथिन) के नीचे दिन-रात गुजार रहे हैं:
- भीगते आशियाने: बारिश शुरू होते ही तंबुओं में पानी टपकने लगता है. गीली लकड़ियों के कारण चूल्हा जलाना भारी चुनौती बन गया है.
- बच्चों के लिए सूखा भोजन जरूरी: चीमा देवी, किरण देवी और नीतीश कुमार ने बताया कि प्रशासन दो वक्त की सामुदायिक रसोई चला रहा है, लेकिन छोटे और दूधमुंहे बच्चों के लिए हर समय वहां से खाना लाना संभव नहीं होता. विस्थापित परिवारों ने सूखे राशन और बच्चों के लिए अलग से पौष्टिक सामग्री की गुहार लगाई है.
- पॉलीथिन की दरकार: कई परिवारों ने बताया कि राहत सामग्री मिली है, लेकिन अभी भी कुछ लोग खुले आसमान के नीचे बिना तिरपाल-पॉलीथिन के रात काटने को मजबूर हैं.
ग्राउंड जीरो पर प्रशासन का एक्शन: 70 किचन और बोट एंबुलेंस तैनात
बाढ़ के व्यापक असर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी ताकत से राहत कार्यों में जुटा हुआ है. जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने बताया:
- प्रभावित क्षेत्र: जिले के 6 प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं, जहां राहत शिविर बनाए गए हैं.
- भोजन व राहत वितरण: पीड़ितों के लिए 70 जगहों पर सामुदायिक किचन (Community Kitchen) लगातार चल रहे हैं. अब तक 38,000 पॉलीथिन शीट्स और 4,000 पैकेट सूखा राशन बांटा जा चुका है. अगले 24 घंटे में 10,000 अतिरिक्त पॉलीथिन वितरित करने की तैयारी है.
- बच्चों के लिए दूध और बोट एंबुलेंस: ICDS के जरिए छोटे बच्चों को दूध उपलब्ध कराया जा रहा है. जलमग्न इलाकों में बोट एंबुलेंस के जरिए डॉक्टरों की टीम घर-घर दवाइयां पहुंचा रही है.
- बेगूसराय सीमा तक मदद: बाढ़ के डर से जो परिवार बेगूसराय सीमा की ओर चले गए हैं, वहां भी मुंगेर प्रशासन की विशेष टीमें राहत सामग्री लेकर भेजी गई हैं.
