17 साल बाद भी नहीं बुझी प्यास, करोड़ों खर्च के बावजूद जमालपुर के 11 वार्डों तक नहीं पहुंचा शुद्ध पानी
Munger News : मुंगेर जिले के रेल Munger News : नगरी जमालपुर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2009 में शुरू की गयी जलापूर्ति योजना 17 साल बाद भी अधूरी पड़ी है. नगर परिषद क्षेत्र के 36 वार्डों में से 11 वार्ड आज भी नियमित जलापूर्ति से वंचित हैं. करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोगों को गर्मी में पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. जिलाधिकारी ने 2027 की गर्मी से पहले वंचित वार्डों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.
मुंगेर के जमालपुर से विजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट : रेल नगरी जमालपुर में नगर परिषद सीमा क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2009 में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट योजना शुरू की गयी थी. नगर परिषद के कुल 36 वार्डों में से तीन वार्ड रेलवे क्षेत्राधिकार में आते हैं, जबकि शेष 33 वार्डों में जलापूर्ति की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसी को दी गयी. वर्तमान में केवल 22 वार्डों में ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है. बाकी 11 वार्डों में कहीं पूरी तरह जलापूर्ति बंद है तो कहीं आंशिक रूप से पानी पहुंच रहा है.
ओवरहेड टैंक बने, लेकिन ऊंचाई बनी बड़ी समस्या
जानकारों के अनुसार शहर में जलापूर्ति के लिए चार ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं. इनमें दो टैंक ईस्ट कॉलोनी थाना क्षेत्र और दो जमालपुर थाना क्षेत्र में स्थित हैं. समस्या तब सामने आयी जब कई वार्ड ओवरहेड टैंक की ऊंचाई से अधिक ऊंचाई वाले इलाके में बसे मिले. नतीजा यह हुआ कि पर्याप्त दबाव नहीं बनने के कारण कई इलाकों तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है.
गर्मी में पानी के लिए मची मारामारी
भीषण गर्मी के बीच जिन वार्डों में जलापूर्ति नहीं हो रही है, वहां के लोग हैंडपंप, प्याऊ और निजी कुओं के सहारे जीवन गुजार रहे हैं. कई मोहल्लों में सुबह से ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी में पानी का संकट विकराल हो जाता है, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकला.
पाइपलाइन कनेक्शन तक नहीं पहुंचा कई घरों में
सरकार ने जलापूर्ति व्यवस्था की जिम्मेदारी बुडको को सौंपी है, लेकिन शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में हजारों घर ऐसे हैं जहां अब तक पाइपलाइन कनेक्शन ही नहीं दिया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से पूरे नगर परिषद क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति संभव नहीं है. इसके लिए नई योजना और नई तकनीकी व्यवस्था की जरूरत होगी.
अंग्रेजों का प्लांट आज भी दे रहा निर्बाध पानी
दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 1862 में रेल इंजन कारखाना के लिए काली पहाड़ी पर अंग्रेजों द्वारा बनाया गया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट आज भी सुचारु रूप से काम कर रहा है. 164 साल पुराने इस प्लांट से रेलवे कॉलोनियों, जमालपुर जंक्शन, लोको कॉलोनी, दौलतपुर कॉलोनी और रेल कारखाना परिसर में आज भी निर्बाध जलापूर्ति की जा रही है. जबकि आधुनिक योजना 17 साल बाद भी लोगों की प्यास नहीं बुझा सकी.