– सर्जन के इंतजार में धूल फांक रहा मॉडल अस्पताल में करोड़ो का ऑपरेशन कक्ष
मुंगेर
सरकार स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए लगातार करोड़ों रुपये केवल आधारभूत संरचनाओं पर खर्च कर रही है. बावजूद मुंगेर में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ नहीं हो पा रही है. जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हाल यह है कि लगभग 20 लाख की जनसंख्या वाले मुंगेर जिला मुख्यालय में 32 करोड़ की लागत से मॉडल अस्पताल बनाया गया. जिसमें एक नहीं, तीन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ऑपरेशन कक्ष बनाया गया, लेकिन बिना सर्जन के इन ऑपरेशन कक्ष में केवल परिवार नियोजन के लाभार्थियों का ही ऑपरेशन हो पा रहा है. जबकि हड्डी, हाइड्रोसिल, गैंगरीन जैसे मामलों में मरीजों को ऑपरेशन कराने या तो बाहर जाना पड़ रहा है या निजी अस्पतालों में मोटी रकम देनी पड़ रही है.
बता दें कि कोरोना काल से पहले ही सदर अस्पताल में उस समय तैनात चिकित्सक डॉ शाहीद मुर्तुजा इस्तीफा देकर चले गये. जिनके जाने के बाद तारापुर अनुमंडल अस्पताल में तैनात एकमात्र सर्जन डॉ कुंदन कुमार भी इस्तीफा देकर चले गये. साल 2024 के अंत तक सदर अस्पताल बिना सर्जन के ही रहा. हालांकि साल 2025 में सदर अस्पताल को जहां हड्डी सर्जन के रूप में डॉ विशाल कुमार मिले. वही जनरल सर्जन के रूप में डॉ नीतीश राज और डॉ निलेश को पदस्थापित किया गया. लेकिन साल 2025 के दिसंबर में ही हड्डी के सर्जन डॉ विशाल इस्तीफा देकर चले गये. वही फरवरी 2026 में जनरल सर्जन डॉ नीतीश राज का स्थानांतरण लखीसराय जिला और डॉ निलेश का स्थानांतरण सदर अस्पताल से अनुमंडल अस्पताल हवेली खड़गपुर हो गया. इसके बाद सिविल सर्जन द्वारा धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त सर्जन डॉ रॉबिन को प्रतिनियुक्ति पर सदर अस्पताल बुलाया गया, लेकिन अब वे भी इस्तीफा देकर जा चुके हैं. जिससे अब सदर अस्पताल एक बार फिर सर्जन विहीन हो चुका है.