– सोमवार को ओपीडी में हुआ 790 मरीजो का पंजीयन, चिकित्सकों की ड्यूटी को लेकर अस्पताल प्रबंधन का लापरवाह
मुंगेरमुंगेर में भीषण गर्मी ने एक ओर जहां लोगों के दिनचर्या को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. वहीं गर्मी के बीच सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल के ओपीडी में ही सोमवार को कुल 790 मरीज इलाज कराने के लिये पहुंचे. जिसमें सर्वाधिक मामले दस्त व डायरिया के थे. इस बीच अस्पताल प्रबंधन का चिकित्सकों की ड्यूटी को लेकर लापरवाह रवैये लगातार मरीजों के लिये मुसीबत बनता जा रहा है.
सोमवार को ओपीडी में पहुंचे 790 मरीज
आमतौर पर सोमवार को सदर अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक रहती है, लेकिन भीषण गर्मी के बीच इस सोमवार को ओपीडी में मरीजों की अप्रत्याशित भीड़ देखने को मिली. अस्पताल के ओपीडी में सोमवार को कुल 790 मरीज इलाज कराने पहुंचे. जिसमें सर्वाधिक मामले दस्त और डायरिया के थे. इसके अतिरिक्त बुखार, पेट दर्द सहित अन्य बीमारियों के मरीज भी अधिक थे.
चिकित्सकों की ड्यूटी को लेकर अस्पताल प्रबंधन का लापरवाह
ओपीडी में चिकित्सकों की ड्यूटी को लेकर अस्पताल प्रबंधन द्वारा ड्यूटी रोस्टर बनाया गया है, लेकिन आपात स्थिति, जिसमें किसी चिकित्सक के अवकाश पर चले जाने या अन्य कार्य में होने पर अस्पताल प्रबंधन उसकी जगह दूसरे चिकित्सक की ड्यूटी लगाने को लेकर पूरी तरह लापरवाह बना है. जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है. सोमवार को ओपीडी में फिजिशयन के रूप में डॉ असीम और आयुष चिकित्सक डॉ शशिशेखर थे. जबकि हड्डी विशेषज्ञ के रूप में डॉ निरंजन थे, लेकिन सोमवार को डॉ निरंजन के कोर्ट में गवाही देने चले जाने के कारण पूर्वाह्न 11.30 बजे तक हड्डी ओपीडी खाली रहा. जबकि नियमानुसार उनके गवाही में जाने पर अस्पताल प्रबंधन को तत्काल रूप से वहां दूसरे चिकित्सक की ड्यूटी लगानी थी, लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण फिजिशयन चिकित्सक ही हड्डी के मरीजों का इलाज करते दिखे. जिससे मरीजों की न केवल लंबी लाइन हो गयी, बल्कि इससे मरीजों का वेटिंग टाइम भी बढ़ गया.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है. जिसके कारण कई बार परेशानी होती है. हलांकि किसी चिकित्सक के दूसरे कार्य पर जाने की स्थिति में अन्य चिकित्सक की ड्यूटी लगायी जानी चाहिए थी. इसे लेकर अस्पताल उपाधीक्षक को निर्देशित किया जायेगा, ताकि आगे से मरीजों को परेशानी न हो.
