मरीजों ने कराया रजिस्ट्रेशन, नहीं हुआ इलाज

मरीज लौटे निराश या गये निजी क्लिनिक

चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार से हुई परेशानी

प्रतिनिधि, मुंगेर

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर गुरुवार को सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया. इससे रोगी परेशान रहे. ओपीडी में पहले तो रोगी का रजिस्ट्रेशन कर लिया गया, लेकिन रोगियों को चिकित्सकों ने नहीं देखा. इससे रोगी इलाज के लिए भटकते रहे और उन्हें बिना इलाज के ही वापस घर लौटना पड़ा.

एक भी सरकारी चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं आये

बताया जाता है कि पूर्व निर्णय के अनुसार भाषा के आह्वन पर इमरजेंसी सेवा को छोड़ कर सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार कर दिया. इसके कारण मरीजों को काफी परेशानी का समाना करना पड़ा. दूर-दूर से मरीज सुबह 7 बजे से ओपीडी में इलाज के लिए सदर अस्पताल के प्री-फेब्रिकेटेट अस्पताल पहुंचने लगे थे. निर्धारित समय सुबह 8 बजे रजिस्ट्रेशन काउंटर भी खुल गया. जहां मरीजों के रजिस्ट्रेशन का सिलसिला चलने लगा. रजिस्ट्रेशन काउंटर पर काम करने वाले कर्मी को भी चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार की जानकारी नहीं थी. वे लगातार रजिस्ट्रेशन कर मरीज और उसके अभिभावक को पुर्जा थमाने लगा. मरीज अंदर गये तो वहां एक आयुष चिकित्सक ने मरीजों का इलाज भी करना शुरू कर दिया. सुबह करीब 9 बजे गार्ड पहुंचे और बोला कि आज चिकित्सकों की हड़ताल है. मरीज नहीं देखा जायेगा. इसके बाद आयुष चिकित्सक ने जहां मरीजों को देखना बंद कर दिया. वहीं हड्डी, दांत समेत अन्य कक्ष बंद हो गये. देखते ही देखते रजिस्ट्रेशन काउंटर, दवा काउंंटर, जांच काउंटर सभी का शटर डाउन हो गया. जबकि एक भी सरकारी चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं आये. अचानक यह सब देख कर मरीज परेशान हो उठे. सभी स्वास्थ्यकर्मी ओपीडी में अपना-अपना काम छोड़ कर घूमने में मशगूल हो गये. जबकि मरीज इधर-उधर भटकने लगे. बहुत देर के बाद मरीजों को पता चला कि आज ओपीडी में चिकित्सक नहीं आयेंगे.

कभी इमरजेंसी तो कभी ओपीडी दौड़ते रहे मरीज व तीमारदार

चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार का व्यापक असर ओपीडी में देखने को मिला है. सदर अस्पताल मुंगेर में इलाज के लिए आये अधिकांश मरीज और उनके परिजन या तो घर वापस लौट गए या फिर निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. जबकि कई मरीज सदर अस्पताल परिसर में भटकते भी नजर आये. इधर ओपीडी, लैब और दवा काउंटर पर भी काम प्रभावित हो गया. जब ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं हुआ तो वे दौड़ कर इमरजेंसी वार्ड पहुंचे. लेकिन वहां तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी ने इमरजेंसी वार्ड बताकर ओपीडी के मरीज को नहीं देखा. इसके कारण मरीज ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड का चक्कर लगाते रहे. लेकिन उनका इलाज नहीं हुआ और वे बैरंग या तो घर लौट गये, या फिर निजी क्लिनिक पहुंच कर अपना इलाज कराया.

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बदहाल व्यवस्था से परेशान रहे मरीज व उनके परिजन

चिकित्सक अगर हड़ताल पर थे, तो रजिस्ट्रेशन काउंटर क्यों खोला गया. उसको भी बंद रखना चाहिए था. हमलोग दूर से इलाज कराने के लिए आये हैं. रजिस्ट्रेशन कराने के बाद पुर्जा भी मिल गया. लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं है. कहीं पर यह सूचना भी नहीं चिपकाया गया है कि आज मरीज हड़ताल पर रहेंगे.

सुखदेव मंडल, मरीज

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मेरे दोनों बेटे की तबीयत खराब है. सुबह 9 बजे रजिस्ट्रेशन कराया. उस समय चिकित्सक बैठे थे. लेकिन अचानक चिकित्सक ने इलाज करना बंद कर दिया. पूछने पर पता चला कि आज चिकित्सक हड़ताल पर हैं, इलाज नहीं होगा. अगर ऐसी बात थी तो मेन गेट में ताला लगा देना चाहिए था. इससे बीमार मरीज और उनके परिजनों को इतना परेशानी नहीं उठानी पड़ती.

मो शब्बीर, मरीज

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इलाज के लिए भटक रही हूं. गर्भवती हूं. पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा है. इमरजेंसी में दिखाने गयी तो बोला ओपीडी में जाइये. मैंने ओपीडी पहुंच कर काउंटर पर रजिस्ट्रेशन भी कराया. लेकिन यहां कहा गया कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं. अब आप ही बताये कि हम कहां इलाज करायेंगे.

रूकमणी कुमारी, मरीज

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भाषा के आह्वान पर यह हड़ताल हुई है. हमलोगों का नैतिक समर्थन हड़ताल को है. हम यहां ड्यूटी पर हैं. चिट्ठा लेकर जो मरीज आये, उसका मैंने इलाज किया. लेकिन जब चिट्ठा कटना बंद हो गया तो हमलोगों ने भी अपना काम बंद कर दिया.

डॉ शशिधर कुमार, आयुष फिजिशियन

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Published by: Birendra kumar sing

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