पुलिस के साथ मुठभेड़ में नक्सलियों ने किया एके-47 हथियार का इस्तेमाल

मुंगेर से नक्सलियों का खात्मा करने के लिए भीमबांध और ऊपरी पैसरा गांव में जहां सीआरपीएफ कैंप की स्थापना की गयी है.

एसटीएफ के साथ राजासराय में मुठभेड़ के बाद नक्सलियों की सक्रियता एक बार फिर आई सामने

मुंगेर. मुंगेर से नक्सलियों का खात्मा करने के लिए भीमबांध और ऊपरी पैसरा गांव में जहां सीआरपीएफ कैंप की स्थापना की गयी है. वहीं एसटीएफ, एसएसबी व मुंगेर पुलिस लगातार जंगल में सर्च ऑपरेशन चला रही है, जिसके कारण पिछले दो-तीन वर्षों से नक्सलियों की सक्रियता नहीं दिख रही थी, लेकिन शनिवार की शाम खड़गपुर थाना क्षेत्र के राजासराय-कंदनी जंगल में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ के बाद एक बार फिर से नक्सलियों की सक्रियता सामने आयी, जो इस बात को स्पष्ट कर रहा है कि नक्सली पुलिस दबिश में अंडरग्राउंड भले हैं, लेकिन पुलिस के खिलाफ गोलीबारी करने में अभी भी पीछे नहीं है.

मुठभेड़ में दोनों ओर से हुई लगभग 200 राउंड फायरिंग

दरअसल एसटीएफ को सूचना मिली थी कि कुख्यात माओवादी सुरेश कोड़ा अपने दस्ता के साथ राजासराय गांव आया हुआ है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ की टीम शनिवार की शाम राजासराय पहुंची. खुद को घिरा देख नक्सली दस्ते ने एसटीएफ पर फायरिंग शुरु कर दी. ग्रामीणों की भीड़ देख कर एसटीएफ ने गांव में गोलीबारी नहीं की. जब नक्सली फायरिंग करते हुए जंगल में घुसे तो एसटीएफ ने भी फायरिंग शुरू की. मुंगेर के एसपी के अनुसार एसटीएफ की ओर से 80 चक्र गोलियां चलायी गयी, लेकिन नक्सलियों ने 125 चक्र गोलियां चली. जो इस बात को स्पष्ट करने के लिए काफी है कि नक्सलियों की सक्रियता अभी भी बनी हुई है, जो पुलिस की कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है. सूत्रों की माने तो नक्सली लीडर अपने दस्ते के साथ इसी जंगल में छिपा हुआ है, क्योंकि इस मुठभेड़ में नक्सली दस्ता जंगल, पहाड़ी क्षेत्र व अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा.

नक्सली सुरेश कोड़ा को नहीं लगी है गोली, कहीं भी नहीं मिला ब्लड स्टेन

एसटीएफ-नक्सली के बीच हुए मुठभेड़ के बाद जब जंगल में पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया तो जगह-जगह खोखा मिले, जो एके-47 हथियार का था. इससे स्पष्ट है कि नक्सलियों ने पुलिस के साथ मुठभेड़ में एके-47 का प्रयोग किया है. सूत्रों की मानें तो सुरेश कोड़ा को गिरते और उठ कर भागते देखा गया, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा था कि सुरेश कोड़ा को गोली लगी है, लेकिन जहां वह गिरा था और जिस रास्ते से वह भागा था, उस इलाके में कहीं भी ब्लड स्टेन नहीं मिला. इससे यह स्पष्ट हो गया कि सुरेश कोड़ा को गोली नहीं लगी है.

भीमबांध जंगल में ही छिपा है नक्सली दस्ता, 3-3 लाख है इनाम

पुलिस के दबाव में मुंगेर के कई शीर्ष नक्सली लीडर व कंपनी कमांडर ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, लेकिन कई अन्य नक्सली आज भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं. इसमें जिले के लड़ैयाटांड थाना क्षेत्र के ऊपरी पैसरा गांव निवासी सुरेश कोड़ा, खड़गपुर थाना क्षेत्र के बघेल गांव निवासी नारायण कोड़ा व बहादुर कोड़ा शामिल हैं. जानकारी के अनुसार सभी भीमबांध, राजासराय, पैसरा, खड़गपुर थाना क्षेत्र के जंगल, धरहरा थाना क्षेत्र के जंगल में छिप कर रह रहे हैं, जो राशन-पानी लेने के लिए जंगल स्थित गांव आते हैं. जब पुलिस की सक्रियता काफी बढ़ जाती है, तो लकड़ी काटने वालों का खाना ले लेते हैं अथवा उसे पैसा देकर खाने का सामान मंगवा ले रहे हैं. सरकार ने सुरेश कोड़ा, बहादुर कोड़ा और नारायण कोड़ा पर तीन-तीन लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया है.

मुंगेर रेंज में नक्सलियों की सक्रियता समाप्त हो चुकी है. जो इक्के-दुक्के बाहर हैं, उसके बारे में सूचना एकत्रित कर उनकी गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी की जा रही है. नक्सलियों के पास मात्र दो ही विकल्प हैं. या तो आत्मसमर्पण कर दे या फिर पुलिस की गोली खाने को तैयार रहें.

राकेश कुमार, डीआइजी, मुंगेर रेंजB

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Author: RANA GAURI SHAN

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