Munger University Teachers Protest: मुंगेर विश्वविद्यालय के सामने बुधवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करने पहुंच गये. बिहार राज्य संबद्ध डिग्री कॉलेज शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में शिक्षकों और कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक की विभिन्न मांगों को जोरदार तरीके से उठाया.
प्रदर्शन का नेतृत्व महासंघ के मुंगेर विश्वविद्यालय अध्यक्ष सह सीनेट सदस्य सत्येंद्र कुमार सिंह ने किया. धरना-प्रदर्शन के बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय और राज्य स्तरीय मांगों से संबंधित ज्ञापन कुलपति को सौंपा. अब प्रदर्शनकारी शिक्षकों और कर्मचारियों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उठाये जाने वाले अगले कदम पर है.
आखिर किन मांगों को लेकर सड़क पर उतरे शिक्षक-कर्मी
महासंघ के मुंगेर विश्वविद्यालय अध्यक्ष सह सीनेट सदस्य सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि महासंघ के निर्देश पर संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक और कर्मचारी विश्वविद्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि कॉलेजों से जुड़ी कई प्रशासनिक और वित्तीय समस्याओं के समाधान की मांग लंबे समय से उठायी जा रही है.
विश्वविद्यालय स्तर की मांगों में शासी निकायों के गठन को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी और दाता प्रतिनिधि के नाम की अधिसूचना जल्द जारी करने की मांग प्रमुख है. इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा नामांकन के समय जमा की गयी राशि सीधे कॉलेजों के खाते में भेजने की मांग की गयी है.
कॉलेजों में सीएलसी, टीसी, सीसी और बोनाफाइड प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शुल्क निर्धारण का अधिकार महाविद्यालय स्तर पर देने की मांग भी रखी गयी है. इसके अलावा नामांकन के लिए ऑनलाइन फॉर्म शुल्क के रूप में प्रति छात्र निर्धारित एक हजार रुपये में कॉलेजों को अंशदान देने की मांग महासंघ ने उठायी.
राज्य स्तर पर भी लंबित हैं कई मांगें
प्रदर्शनकारियों की मांगें केवल मुंगेर विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं. महासंघ ने राज्य स्तर पर भी कई मुद्दे उठाये हैं. इनमें राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने वाले अधिनियम को रद्द करने की मांग शामिल है.
इसके साथ ही नियमित वेतन और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गयी. सबसे महत्वपूर्ण मांगों में सत्र 2015-18 से 2022-25 तक के आठ वर्षों की परीक्षा परिणाम आधारित बकाया अनुदान राशि का भुगतान शामिल है. महासंघ ने इस बकाया अनुदान का बढ़ी हुई महंगाई दर के अनुसार एकमुश्त भुगतान करने की मांग की है.
सभी कोटि की छात्राओं और एससी-एसटी कोटि के छात्र-छात्राओं की राशि की प्रतिपूर्ति भी जल्द कॉलेजों को देने की मांग की गयी है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन मुद्दों का सीधा संबंध संबद्ध कॉलेजों की वित्तीय स्थिति और वहां काम करने वाले शिक्षक-कर्मियों से है.
Munger University Teachers Protest: ज्ञापन सौंपने के बाद अब आगे क्या?
धरना-प्रदर्शन के बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया. इससे अब मांगों पर विश्वविद्यालय स्तर पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद बनी है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन मांगों पर क्या निर्णय लिया है या इनके समाधान के लिए कोई समयसीमा तय की गयी है.
इस बीच प्रदर्शन के दौरान शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन में ओम प्रकाश पंडित, अमरदीप प्रसाद, अमरेंद्र कुमार सिंह, गजेंद्र कुमार मिश्रा, सुबोध कुमार शर्मा, हामिद इकबाल, सुनील कुमार सिंह, सुशील कुमार वर्मा, छोटेलाल मंडल, अशोक कुमार ठाकुर, वंदना कुमारी, शशि भूषण प्रसाद चौरसिया, सुनील कुमार सिंह, शिवपूजन सिंह और अविनाश कुमार सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मी मौजूद रहे.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से लंबित वेतन, पेंशन, अनुदान और कॉलेजों से जुड़ी प्रशासनिक मांगों पर विश्वविद्यालय और राज्य सरकार की ओर से कब तक ठोस पहल होती है. ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रदर्शनकारियों को समाधान की दिशा में आगे की कार्रवाई का इंतजार है.
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