3.55% कुपोषण के बावजूद तीन महीने में सिर्फ 40 बच्चे पहुंचे पोषण पुनर्वास केंद्र, डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती

मुंगेर जिले में कुपोषण की दर 3.55% है, लेकिन सदर अस्पताल के 14 बेड वाले पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में पिछले तीन महीनों में केवल 40 बच्चे ही पहुंचे हैं. डॉक्टरों की कमी और विभागीय उदासीनता के चलते यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रही है.

Malnutrition: जिले में कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए सरकार की ओर से सदर अस्पताल में 14 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित किया जा रहा है. यहां कुपोषित बच्चों को विशेष आहार, चिकित्सकीय निगरानी और उनकी माताओं के रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इसके बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद बच्चे इस सुविधा से वंचित हैं.

3.55 प्रतिशत कुपोषण, लेकिन एनआरसी में पहुंचे सिर्फ 40 बच्चे

आईसीडीएस (इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज) के आंकड़ों के अनुसार मुंगेर जिले में कुपोषण की दर 3.55 प्रतिशत है. इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले तीन महीनों में पोषण पुनर्वास केंद्र में केवल 40 कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया. इनमें आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम) की टीम ने केवल दो बच्चों को भेजा, जबकि आईसीडीएस के तहत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों से 12 और विभिन्न प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों से 26 बच्चों को एनआरसी भेजा गया.

14 बेड का एनआरसी, 15 दिन तक मिलता है विशेष उपचार

सदर अस्पताल में संचालित 14 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में पांच वर्ष तक के कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर 15 दिनों तक विशेष उपचार दिया जाता है. बच्चों के लिए अलग पोषणयुक्त आहार की व्यवस्था रहती है. साथ ही उनकी माताओं के रहने और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तथा उपचार अवधि के दौरान उन्हें निर्धारित आर्थिक सहायता भी दी जाती है.

डॉक्टरों की कमी से प्रभावित हो रही व्यवस्था

पोषण पुनर्वास केंद्र में नियमित बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है. वर्तमान में एसएनसीयू वार्ड के चिकित्सकों के भरोसे एनआरसी का संचालन किया जा रहा है. आरोप है कि चिकित्सक नियमित रूप से वार्ड का राउंड नहीं कर पाते. रात में किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टरों को बुलाना पड़ता है. इससे भर्ती बच्चों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ जाती है.

कुपोषित बच्चों की पहचान पर भी उठ रहे सवाल

Malnutrition: सरकारी व्यवस्था के अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें एनआरसी भेजना होता है. लेकिन तीन महीने में केवल 40 बच्चों के भर्ती होने से इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं.

क्या बोले सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. राजू ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती सभी कुपोषित बच्चों को समुचित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने स्वीकार किया कि डॉक्टरों की कमी के कारण कुछ कठिनाइयां हैं. उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों को अधिक संख्या में एनआरसी तक लाने के लिए आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग के साथ लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं.

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लेखक के बारे में

By अमित झा

अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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