भीमबांध अभ्यारण्य में चीता, तेंदुआ, भालू समेत मौजुद हैं कई वन्य जीव प्रजातियां

इन हार्ड डिस्क को विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून भेज दिया गया है

– भीमबांध में 100 ट्रैप कैमरों की निगरानी से हुआ खुलासा, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून भेजा गया हार्ड डिस्क

मुंगेर

मुंगेर का भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य एक बार फिर जैव विविधता का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है. लगभग 680 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्रफल में फैले जंगली क्षेत्र में चीता, तेंदुआ, भालू समेत कई वन्य जीव प्रजातियां मौजुद हैं. इस घने जंगल में कौन-कौन से वन्य जीव मौजूद हैं और उनकी वास्तविक संख्या कितनी है, इसका वैज्ञानिक आकलन करने के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है. इसके तहत अभ्यारण्य के अलग-अलग हिस्सों में 100 हाई-रिजॉल्यूशन ट्रैप कैमरे लगाए गए थे, जिनमें पिछले दो महीनों के दौरान वन्य जीवों की हजारों तस्वीरें और वीडियो कैद हुए हैं. जिसमें वनजीवन का अनोखा संसार देखने को मिला है.

अलग-अलग हिस्सों में लगे थे 100 हाई-रिजॉल्यूशन ट्रैप कैमरे

वन विभाग के अनुसार अलग-अलग हिस्सों में 100 हाई-रिजॉल्यूशन ट्रैप कैमरे लगाये गये थे. इन कैमरों को 1 अप्रैल को जंगल के विभिन्न संवेदनशील इलाकों, जलस्रोतों, पशु गलियारों और पहाड़ी रास्तों पर स्थापित किया गया था. दो महीने की मॉनिटरिंग के बाद 30 मई को सभी कैमरों को हटाकर उनकी हार्ड डिस्क सुरक्षित तरीके से एकत्र की गई. अब इन हार्ड डिस्क को विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून भेज दिया गया है. विशेषज्ञों द्वारा डिजिटल विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि भीमबांध के जंगलों में किस प्रजाति के वन्य जीवों की संख्या कितनी है.

भीमबांध में दिखा वन्यजीवन का अनोखा संसार

प्रारंभिक स्तर पर मिली जानकारी वन विभाग के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है. सूत्रों के अनुसार कैमरों में बाघ, तेंदुआ, भालू, चीता, सांभर, चौसिंगा हिरण, जंगली सूअर, सियार, नेवला, लंगूर, जंगली खरगोश और कई दुर्लभ पक्षियों सहित तीन दर्जन से अधिक वन्य प्रजातियों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं. कई स्थानों पर रात के समय बड़े मांसाहारी जीवों की आवाजाही भी कैमरों में कैद हुई है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अभ्यारण्य में ट्रैप कैमरा सर्वेक्षण वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है. इससे न केवल जानवरों की संख्या का आकलन होता है, बल्कि उनके आवागमन के रास्ते, रहन-सहन और प्रजनन संबंधी गतिविधियों की भी सटीक जानकारी मिलती है. भविष्य में इसी आधार पर संरक्षण योजनाएं तैयार की जाती हैं.

कहते है डीएफओ

मुंगेर वन प्रमंडल पदाधिकारी अम्बरीष कुमार मल्ल ने बताया कि भीमबांध अभ्यारण्य में वन्य जीवों की वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से कैमरा ट्रैप सर्वे कराया गया है. इसके लिए 100 कैमरे अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए थे. सभी कैमरों की हार्ड डिस्क भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेज दी गई है. वहां विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि अभ्यारण्य में विभिन्न वन्य प्रजातियों की संख्या कितनी है और संरक्षण की दिशा में आगे क्या कदम उठाने होंगे.

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