Munger Agriculture News: मुंगेर में मेहनत किसान करता है, लेकिन बदलते मौसम, बढ़ती लागत और नई तकनीकों के बीच उसकी सबसे बड़ी जरूरत सही समय पर सही सलाह की है. कृषि वैज्ञानिकों की ओर से विकसित तकनीक अगर किसान के खेत तक नहीं पहुंचती, तो उसका वास्तविक लाभ भी नहीं मिल पाता. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर में गुरुवार को 25वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गयी.
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियां केवल प्रशिक्षण और तकनीक बताने तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों की वास्तविक समस्याओं और स्थानीय परिस्थितियों से सीधे जुड़ें. किसानों की जरूरत पहचानने, खेत तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाने और कृषि व संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई.
खेत की समस्या समझकर ही पहुंचे कृषि तकनीक
बैठक के मुख्य अतिथि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के उपनिदेशक प्रशिक्षण डॉ. अभय मानकर ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों का वास्तविक लाभ तभी किसानों तक पहुंच सकता है, जब वैज्ञानिक तकनीकों को खेतों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किसानों तक पहुंचाया जाए.
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित करना जरूरी है. इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों, संबंधित विभागों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर उनके समाधान की दिशा में काम किया जाना चाहिए.
यानी किसानों को एक जैसी तकनीक बताने के बजाय उनके क्षेत्र, फसल और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कृषि सलाह देने पर जोर दिया गया.
सिर्फ खेती नहीं, आय बढ़ाने के दूसरे रास्तों पर भी जोर
बैठक में किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास की जरूरत बतायी गयी. कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ संबद्ध कृषि गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करने पर विचार हुआ.
किसानों को नई कृषि तकनीकों की जानकारी देने, उन्हें खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित करने और सही समय पर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गयी. विशेषज्ञों का मानना है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत, तकनीक और अतिरिक्त आय के विकल्पों पर भी ध्यान देना जरूरी है.
कृषि विज्ञान केंद्र के कामकाज की हुई समीक्षा
वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर की ओर से संचालित विभिन्न कृषि प्रसार और प्रशिक्षण गतिविधियों की समीक्षा की गयी. किसानों के हित में अब तक किये गये कार्यों के साथ आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई.
समिति के सदस्यों ने किसानों के सामने कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए सुझाव दिये. साथ ही नवीन तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया.
वैज्ञानिकों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत
बैठक में यह बात भी सामने आयी कि किसानों तक तकनीक पहुंचाने के लिए सिर्फ कृषि वैज्ञानिकों का प्रयास पर्याप्त नहीं है. इसके लिए कृषि विभाग, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्र और किसानों के बीच लगातार संवाद जरूरी है.
स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं को समझकर शोध और प्रशिक्षण की दिशा तय करने से तकनीक का अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो सकता है. इससे किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह मिलने के साथ खेती में नई तकनीकों को अपनाने का अवसर भी मिलेगा.
ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े विशेषज्ञ
बैठक में ऑनलाइन माध्यम से एटीएआरआइ, पटना के डॉ. अमरेन्द्र कुमार और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आरके सोहाने शामिल हुए. उन्होंने भी कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों और किसानों तक तकनीक पहुंचाने से जुड़े विषयों पर भागीदारी की.
बैठक में वानिकी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल पासवान, नाबार्ड के डीडीएम सुमित कुमार, आत्मा के सहायक उपपरियोजना निदेशक पवन कुमार और उपनिदेशक कृषि अभियंत्रण राजकुमार मौजूद थे.
क्षेत्रीय अनुसंधान उपकेंद्र मुंगेर की ओर से डॉ. रागिनी कुमारी और डॉ. अविनाश सरिन सक्सेना ने भाग लिया. कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर के वरीय वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने आगत अतिथियों का स्वागत किया.
Munger Agriculture News: अब किसानों तक पहुंचेगी बैठक में बनी दिशा
25वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में हुई चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि कृषि तकनीक और प्रशिक्षण को किसानों की वास्तविक जरूरत से जोड़ा जाए. अब चुनौती बैठक में तय प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने की होगी.
किसानों की समस्या समय पर चिन्हित होती है, वैज्ञानिक सलाह खेत तक पहुंचती है और नई तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल होता है, तो इसका सीधा फायदा उत्पादन, लागत और किसान की आय पर पड़ सकता है.
