जानलेवा बना जमालपुर स्टेशन रोड का जाम, एंबुलेंस को भी नहीं दिया गया रास्ता

जाम में आधा घंटा तक एंबुलेंस फंसा रहा और एंबुलेंस पर सवार मरीज जिंदगी-मौत से जूझता रहा.

सिरियस पेंसेंट को लेकर आधा घंटा तक जाम में फंसा रहा एंबुलेंस, एंबुलेंस से उतरकर मरीज रास्ता देने का लगाते रहे गुहार

जमालपुर

जमालपुर शहर में सड़कों पर लगने वाली जाम अब जानलेवा साबित होने के कगार पर पहुंच गई है. परंतु जाम से छुटकारा दिलाने के लिए न तो स्थानीय पुलिस प्रशासन संज्ञान ले रहे हैं और न ही यातायात पुलिस. हाल यह रहा कि जाम में आधा घंटा तक एंबुलेंस फंसा रहा और एंबुलेंस पर सवार मरीज जिंदगी-मौत से जूझता रहा. मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजर जमालपुर स्टेशन रोड में देखने को मिला.

जाम में फंसा रहा एंबुलेंस, परिजन रास्ता देने की गुहार लगाते रहे

जानकारी के अनुसार धरहरा की ओर से एक सीरियस पेसेंट को लेकर आ रहा एक एम्बुलेंस वाहन जामलपुर स्टेशन मार्ग में जाम में फंस गया. हाल यह था कि न तो एंबुलेंस पीछे हट सकता था और न ही आगे बढ़ पा रहा था. जबकि मरीज के साथ जाने वाले लोग वाहन चालकों से वहां को रास्ता देने की गुहार लगा रहे थे. परंतु मरीज के परिजनों की बात सुनने के लिए कोई वाहन चालक तैयार नहीं था. सभी वाहन चालक अपने-अपने वाहनों को आगे ले जाने के फिराक में लगे हुए थे. आसपास जा रहे राहगीरों ने बताया कि जमालपुर शहर में ट्रैफिक व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है. जिसके कारण प्रतिदिन हजारों राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लोगों ने बताया कि खासकर जुबली बेल चौक से लेकर स्टेशन चौक तक रोजाना दिन में 4 से 5 बार भयंकर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और इससे निजात दिलाने के लिए पुलिस प्रशासन कोई संज्ञान नहीं लेती है.

ई-रिक्शा व ऑटो चालकों की मनमानी से लगता है जाम

स्थानीय लोगों की मानें तो जाम की स्थिति में कई यात्रियों के ट्रेनें भी छूट जाती है तो कार्यालय जाने वाले कर्मी समय पर अपना कार्यालय भी नहीं पहुंच पाते हैं. और तो और छोटे-छोटे बच्चे जो स्कूल वहां से अपना विद्यालय जा रहे होते हैं वह भी जाम के कारण लेट हो जाते हैं. इतना ही नहीं जाम में फंसने वाले राहगीरों की मानसिक स्थिति चिड़चिड़ापन वाली हो जाती है. बताया गया कि ई-रिक्शा चालकों की मनमानी और ऑटो रिक्शा स्टैंड से ऑटो लेकर स्टेशन रोड में सवारी बैठाने के लिए ऑटो खड़ा कर देने के कारण अक्सर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. यदि स्टेशन रोड से ऑटो और ई रिक्शा की पार्किंग को हटा दिया जाए तो जाम की स्थिति से लोगों को राहत मिल सकती है. लोगों का यह भी कहना है कि जब कोई अधिकारी या अति विशिष्ट लोग इस मार्ग से गुजरते हैं तब कुछ समय के लिए वर्दीधारी जवान को तैनात कर दिया जाता है और ट्रैफिक को नियंत्रित भी कर लिया जाता है. परंतु अधिकारी या अति विशिष्ट लोग के वहां से गुजरने के बाद फिर स्थिति यथावत हो जाती है.

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Author: ANAND KUMAR

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