हिंदी अंतरराष्ट्रीय भाषा हो चुकी है, अब हिंदी को राष्ट्रभाषा के आसन पर बिठाने की जरूरत : डॉ चौधरी

अब बस हिंदी को राष्ट्रभाषा के आसन पर बिठाने की जरूरत है.

मुंगेर ————————– साहित्य प्रहरी के तत्वावधान में रविवार को मंगल बाजार स्थित यदुनंदन झा द्विज के आवासीय परिसर में उनकी ही अध्यक्षता में हिंदी दिवस का आयोजन किया गया. संचालन शिवनन्दन सलिल ओर एहतेशाम आलम ने किया. मुख्य अतिथि के रूप में एसपी महाविद्यालय दुमका झारखंड के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ रामवरण चौधरी और विशिष्ट अतिथि आईटीसी मुंगेर के उपप्रबंधक रेवा शंकर मौजूद थे. डॉ रामवरण चौधरी ने कहा कि हिंदी अनेक संघर्षों और उपेक्षाओं को सहते हुए आज जिस मुकाम पर है, यह हिंदी की जिजीविषा शक्ति का परिणाम है. आज हिंदी अंतरराष्ट्रीय भाषा हो चुकी है, अब बस हिंदी को राष्ट्रभाषा के आसन पर बिठाने की जरूरत है. शिवनंदन सलिल ने कहा कि हम हिंदी को किसी भाषा का प्रतिस्पर्धी न बना कर इसे गंगा समझें और विविध भाषाओं को सहायक नदियों की भांति आदर दें. रेवा शंकर ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग की और सभी भाषाओं को भी विकसित होने का अवसर देने की बात कही. यदुनंदन झा द्विज ने कहा कि हिन्दी भारत की राजभाषा ही नहीं, यह भारत की संस्कृति को अपने दामन में समेटे है. अब वक्त आ गया है कि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित की जाए. कार्यक्रम के दूसरे चरण में भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ. जिसमें कुमार विजय गुप्त, डॉ रघुनाथ भगत, विजेता मुद्गलपुरी, अशोक कुमार शर्मा, अलख निरंजन कुशवाहा, जुबैर आलम, सनौवर शादाब, श्रेया सोनम, शिवनंदन सलिल, सुनील सिन्हा, ज्योति कुमार सिन्हा, प्रमोद कुमार निराला, प्रभात मिलिंद, आचार्य नारायण शर्मा, यदुनंदन झा द्विज , विभूति नारायण, डॉ रामवरण चौधरी, मिथिलेश कांति, अब्दुल्ला बुखारी, एहतेशाम आलम ने अपनी कविता का पाठ किया.

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By BIRENDRA KUMAR SING

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