असरगंज (मुंगेर) से हिमांशु कुमार सिंह की रिपोर्ट:
Genealogy Certificate Delay Jankalyan Shivir: असरगंज प्रखंड में सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता का मामला सामने आया है. वंशावली प्रमाणपत्र बनवाने के लिए एक दिव्यांग युवक पिछले 20 से 25 दिनों से अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है.
मां के निधन के बाद पारिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जरूरी वंशावली प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश कर रहे एक दिव्यांग युवक की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. असरगंज प्रखंड के छोटी कोरियन गांव निवासी आशीष कुमार पिछले कई दिनों से अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनका काम पूरा नहीं हो पाया है.
मां की मौत के बाद शुरू हुई परेशानी
आशीष कुमार ने बताया कि फरवरी माह में उनकी मां का निधन हो गया था. इसके बाद पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे के लिए वंशावली प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ी. उन्होंने नियमानुसार आवेदन भी दिया, लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया.
हर बार मिलता है आश्वासन
पीड़ित का आरोप है कि अंचल कार्यालय पहुंचने पर अधिकारी और कर्मचारी हर बार “दो दिन में काम हो जाएगा” कहकर वापस लौटा देते हैं. लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक वंशावली तैयार नहीं की गई है.
जनकल्याण शिविर से भी लौटा निराश
समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर आशीष कुमार ने प्रखंड स्तर पर आयोजित जनकल्याण शिविर में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई. लेकिन वहां से भी उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल सका. इससे उनकी निराशा और बढ़ गई है.
हाथों और घुटनों के बल पहुंचता है कार्यालय
सबसे मार्मिक पहलू यह है कि दोनों पैरों से दिव्यांग आशीष कुमार सरकारी कार्यालय परिसर तक हाथों और घुटनों के बल पहुंचकर अपनी फरियाद अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. भीषण गर्मी में भी लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने से वह मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हो चुके हैं.
क्या कहते हैं अंचल अधिकारी
इस संबंध में अंचल अधिकारी उमेश शर्मा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था. उन्होंने कहा कि अंचल कार्यालय में दिव्यांग एवं वृद्धजनों को प्राथमिकता के आधार पर सुविधा प्रदान की जाती है. मामले की जानकारी मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
अब सवाल यह है कि जनकल्याण और त्वरित सेवा के दावों के बीच एक दिव्यांग युवक को अपने अधिकार के लिए कब तक भटकना पड़ेगा और उसकी समस्या का समाधान आखिर कब होगा.
