मुंगेर में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है. पिछले 24 घंटे में जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है, जिससे दियारा और चौर क्षेत्रों में बाढ़ का संकट गहराने लगा है. केंद्रीय जल आयोग की गुरुवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार बुधवार रात 10 बजे गंगा का जलस्तर 38.70 मीटर था, जो रातभर में 16 सेंटीमीटर बढ़कर गुरुवार सुबह 38.86 मीटर पर पहुंच गया. मुंगेर में खतरे का निशान 39.33 मीटर है. इस तरह गंगा का पानी खतरे के निशान से महज 41 सेंटीमीटर नीचे रह गया है.
जफरनगर, कुतलूपुर और टिकरामपुर में बिगड़ने लगी स्थिति
जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण मुंगेर सदर प्रखंड के गंगा पार स्थित जफरनगर, कुतलूपुर और टिकरामपुर पंचायतों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने लगी है. पंचायतों के कई इलाकों में पानी फैल चुका है और संपर्क मार्गों पर भी पानी चढ़ गया है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हो गया है. कई गांवों में बाढ़ का पानी अब घरों में प्रवेश करने लगा है.
घरों में पानी घुसा तो ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन
बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश करने के बाद ग्रामीणों का पलायन शुरू हो गया है. गंगा पार सीताचरण गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण बुधवार रात गांव छोड़कर जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के समीप बबुआ घाट पहुंचे. ग्रामीण अपने परिजनों और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थान की तलाश में यहां पहुंचे हैं.
ग्रामीणों ने बताया कि रात में अचानक पानी बढ़ने लगा और देखते ही देखते गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया. जान-माल की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर जाना पड़ा.
जफरनगर में बाढ़ के साथ कटाव का भी खतरा
जफरनगर में बाढ़ के साथ कटाव का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है. जफरनगर निवासी मनीष कुमार ने जिलाधिकारी को व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजकर मदद की गुहार लगायी है. उन्होंने बताया कि गांव में पानी प्रवेश करने के साथ दर्जनों घर कटाव की जद में आ गये हैं. कभी भी बड़े पैमाने पर कटाव होने की आशंका बनी हुई है.
ग्रामीणों की स्थिति ऐसी है कि वे अपने घरों से जरूरी सामान तक सुरक्षित नहीं निकाल पा रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से ग्रामीणों को घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है.
जलस्तर बढ़ने की रफ्तार ने बढ़ायी चिंता
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है. लोगों को आशंका है कि यदि इसी रफ्तार से जलस्तर बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और विकराल हो सकती है. प्रशासन के सामने प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ कटाव से बचाव और राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती भी बढ़ गयी है.
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