एक कमरे में चल रहा निगम का इंजीनियरिंग विभाग, बैठते हैं एक साथ 14 अभियंता

सरकारी कार्यालयों में आम जनता के लिए मूलभूत सुविधाएं (बैठने, पीने का पानी, शौचालय) सुनिश्चित करने को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है.

नगर निगम : जहां से प्रतिवर्ष खर्च होती है 100 करोड़ से अधिक की राशि, वहां कर्मी को बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं

– कशमकश में काम निबटा रहे कर्मचारी, अधिकारियों को भी हो रही परेशानी

मुंगेर. सरकारी कार्यालयों में आम जनता के लिए मूलभूत सुविधाएं (बैठने, पीने का पानी, शौचालय) सुनिश्चित करने को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है. जिसका उद्देश्य नागरिकों को कार्यालयों में सुगम और सम्मानजनक अनुभव प्रदान करना है, लेकिन मुंगेर नगर निगम एक ऐसा कार्यालय है, जहां से हर वर्ष करीब 100 करोड़ से अधिक खर्च किया जाता है, लेकिन उनके अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक को बैठने के लिए उचित वातावरण नहीं मिल रहा है. हद तो यह है कि जनता द्वारा चुने गये वार्ड पार्षदों और उनकी जनता के लिए बैठने तक की व्यवस्था नहीं है.

नगर निगम का प्रशासनिक भवन अंग्रेज जमाना का बना हुआ है. जो कभी नगरपालिका हुआ करता था और आज यह नगर परिषद से उत्क्रमित होकर नगर निगम बन चुका है. यहां काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या करीब 300 से अधिक है, जबकि कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 80 के करीब है. कर संग्रह व सफाई एजेंसी के कर्मचारी भी इसी कार्यालय में बैठते हैं. सामान्य शाखा के कर्मचारियों के बैठने के लिए बेहद ही छोटा-छोटा केबिन बना हुआ है, जबकि जन्म-मृत्यु शाखा में भी छोटा-छोटा केबिन बना हुआ है. जहां पर कर्मचारी किसी प्रकार अपना काम निबटा रहे.

कर संग्रह शाखा एक हॉल में संचालित हो रहा है. जहां कर निगम के कर्मचारी से लेकर कर संग्रह करने वाले एजेंसी के कर्मचारी बैठते हैं. यहां 30 से अधिक कर्मचारी बैठते हैं. इतना ही कार्यालय में जिधर भी छोटे-छोटे कमरे है, उसमें कोई न कोई कार्यालय जरूर संचालित हो रहा है.

अधिकारियों के लिए भी नहीं है कार्यालय की समुचित व्यस्था

प्रभात खबर स्कैन में पाया गया कि उप नगर आयुक्त के बैठने के लिए भी समुचित कार्यालय की व्यवस्था नहीं है, जबकि योजना शाखा और एकाउंटेंट कार्यालय में एक के बाद दूसरे कर्मी के बैठने के बाद वहां काम करने वाले कर्मी को काफी परेशानी होती है. ये दोनों कार्यालय निगम का महत्वपूर्ण कार्यालय है. इतना ही एक सिटी मैनेजर का कार्यालय निगम के एक कोने में बने कमरे में है, तो दूसरे सिटी मैनेजर का कार्यालय परिसर के एक छोटे कमरे में है. निगम कार्यालय के ऊपरी तल पर स्वच्छता पदाधिकारी का कार्यालय है. जहां दो-दो स्वच्छता पदाधिकारी किसी तरह बैठ कर समय गुजार रहे हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर कर्मी ने बताया कि नगर आयुक्त, मेयर व उप मेयर के कार्यालय की बात छोड़ दें तो यहां किसी अधिकारी व कर्मचारी को बैठने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है. इस कारण तनाव में रहकर काम का निष्पादन करना मजबूरी रहती है.

वार्ड पार्षद व जनता को बैठने तक की नहीं है व्यवस्था

यह नगर निगम पहला नगर निगम होगा, जहां जनता द्वारा चुने गये वार्ड पार्षदों को बैठने के लिए किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. इतना ही नहीं जिस शहरवासियों के टैक्स से निगम को राजस्व की प्राप्ति होती है, उस शहरवासियों को बैठने तक की कोई व्यवस्था निगम प्रशासन ने नहीं की है. अगर किसी शहरवासी को काम कराने में घंटा-दो घंटा का समय लग जाता है तो उन्हें खड़े-खड़े समय वहां गुजारना पड़ता है. इसमें खासकर महिला व वृद्ध को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 13 अप्रैल को नगर भवन में आहुत बजट बैठक में एक वार्ड पार्षद ने काम से आने वाले शहरवासियों और पार्षदों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग की. उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगर निगम में चपरासी के बैठने तक की व्यवस्था है, लेकिन जनता द्वारा चुने गये हम वार्ड पार्षदों को बैठने तक की व्यवस्था नहीं है.

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12X16 के कमरे बैठते हैं 14 अभियंता

मुंगेर. शहर में जो भी विकास चल रहा है. उसको गुणवत्तापूर्ण व ठिकाऊ बनाने में नगर निगम के अभियंत्रण विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन यहां काम करने वाले अभियंताओं को योजना पर चर्चा करने व बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है. 12X16 के कमरे में निगम का इंजीनियरिंग विभाग संचालित हो रहा है. जहां अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, कंप्यूटर ऑपरेटर एक साथ बैठते हैं. मिली जानकारी के अनुसार, इस कमरे में एक अधीक्षण अभियंता व उनके तीन सहायक अभियंता बैठते है, जबकि कार्यपालक अभियंता सहित तीन सहायक अभियंता एवं छह कनीय अभियंता इसी कमरे में बैठते है. जबकि सभी का ऑनलाइन काम निष्पादन के लिए एक कंप्यूटर ऑपरेटर है, वह भी इसी कमरे में बैठ कर अपना काम संचालित करते हैं.

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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