पार्वती तपस्या द शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुये श्रद्धालु

पार्वती तपस्या द शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुये श्रद्धालु

धरहरा धरहरा प्रखंड के मोहनपुर गांव स्थित कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय शिवपुराण कथा के पांचवें दिन गुरुवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. अयोध्या से पधारे कथाव्यास श्री गरूणेश जी महाराज ने शिव–पार्वती विवाह के पावन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. कथा श्रवण के लिए मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु जुटे रहे. कथावाचक ने बताया कि माता सती के आत्मदाह के बाद देवी ने पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. बचपन से ही उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने का दृढ़ संकल्प लिया. नारद मुनि के मार्गदर्शन में माता पार्वती ने कठोर तपस्या आरंभ की. उन्होंने पहले फल-फूल का त्याग किया और अंत में निर्जल-निराहार रहकर वर्षों तक तप किया. उनकी इस कठिन साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया. कथा के दौरान शिव–पार्वती विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया गया. कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव ने पार्वती की निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए छद्म वेश धारण कर स्वयं की निंदा की, लेकिन पार्वती अपने अटल प्रेम और विश्वास पर अडिग रहीं. इसके बाद भगवान शिव नंदी पर सवार होकर भस्म रमाए, भूत-प्रेत, गणों और देवताओं के साथ भव्य बारात लेकर विवाह मंडप पहुंचे. हिमालय के आंगन में वैदिक मंत्रोच्चार और सप्तऋषियों की उपस्थिति में शिव–पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ. कथावाचक ने बताया कि शिव और शक्ति का यह मिलन ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक है. इसी दिव्य विवाह के परिणामस्वरूप तारकासुर के वध का मार्ग प्रशस्त हुआ. यह कथा श्रद्धालुओं को समर्पण, विश्वास और सच्ची भक्ति के महत्व का संदेश देती है. कथा के दौरान “हर-हर महादेव” के जयकारों और भजन-कीर्तन से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा.

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Published by: Amit jha

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