मुंगेर के धरहरा में मोबाइल छोड़ अब मैदान में दौड़ेंगे बच्चे, 3 जून से शुरू होगी मुफ्त फुटबॉल कोचिंग

Dharhara Football Initiative: धरहरा में बच्चों को मोबाइल और वीडियो गेम की दुनिया से निकालकर मैदान तक लाने की अनोखी पहल शुरू होने जा रही है. 3 जून से गांधी मैदान में बच्चों के लिए मुफ्त फुटबॉल कोचिंग शिविर लगाया जाएगा, जहां खेल के साथ अनुशासन और फिटनेस की भी ट्रेनिंग मिलेगी.

धरहरा से प्रतिनिधि की रिपोर्ट.

Dharhara Football Initiative: बदलते दौर में जहां बच्चे मोबाइल, वीडियो गेम और सोशल मीडिया में उलझते जा रहे हैं, वहीं धरहरा में उन्हें खेल के मैदान तक लाने की सराहनीय पहल की गई है. शंकर स्पोर्टिंग क्लब धरहरा की ओर से आगामी 3 जून से 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए निशुल्क फुटबॉल प्रशिक्षण शिविर शुरू किया जाएगा. यह प्रशिक्षण धरहरा प्रखंड मुख्यालय स्थित गांधी मैदान में आयोजित होगा. क्लब का उद्देश्य बच्चों में खेल भावना विकसित करना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है.

मोबाइल की लत से बच्चों को बचाने की कोशिश

शंकर स्पोर्टिंग क्लब धरहरा के सचिव सह फुटबॉल कोच अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आज के समय में बच्चे धीरे-धीरे खेलकूद से दूर होते जा रहे हैं. मोबाइल फोन, वीडियो गेम और सोशल मीडिया की बढ़ती लत बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर रही है. ऐसे में खेल ही ऐसा माध्यम है जो बच्चों को अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना सिखा सकता है.

फुटबॉल से बढ़ेगी फिटनेस और आत्मविश्वास

कोच अनिल कुमार सिंह ने कहा कि फुटबॉल केवल एक खेल नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास का माध्यम है. इससे बच्चों की शारीरिक क्षमता मजबूत होती है, मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है. खेल बच्चों को आपसी समन्वय और संघर्ष की भावना भी सिखाता है.

ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच

क्लब की ओर से कहा गया कि इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को आगे लाना है. बच्चों को फुटबॉल की बारीकियों के साथ फिटनेस, अनुशासन और खेल भावना की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी. प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भविष्य में स्थानीय और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका भी मिलेगा.

अभिभावकों से की गई खास अपील

क्लब के पदाधिकारियों ने अभिभावकों से अपने बच्चों को खेल के प्रति प्रेरित करने और नियमित रूप से मैदान भेजने की अपील की है. स्थानीय खेल प्रेमियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चे मोबाइल और अन्य बुरी आदतों से दूर रहेंगे और खेल के जरिए बेहतर भविष्य की ओर बढ़ेंगे.

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Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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