Shravani Mela : सावन के पवित्र महीने में मुजफ्फरपुर निवासी मिथलेश कुमार अपनी पत्नी रेखा देवी, तीन वर्षीय बेटे आयुष और मात्र दो माह की बेटी राधा कुमारी के साथ दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं. मिथलेश ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से दंडवत यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने बाबा से पुत्री प्राप्ति की मन्नत मांगी थी और संकल्प लिया था कि बेटी होने पर विशेष डोली बनवाकर उसे साथ लेकर बाबा धाम की यात्रा करेंगे. मन्नत पूरी होने के बाद अब पूरा परिवार आस्था के इस कठिन मार्ग पर चल पड़ा है.
'बेटी भाग्य नहीं, सौभाग्य होती है'
मिथलेश कुमार ने भावुक होकर कहा कि परिवार और परिचितों ने इतनी छोटी बच्ची को यात्रा में साथ ले जाने से मना किया था, लेकिन उन्हें बाबा बैद्यनाथ की कृपा पर पूरा विश्वास है. उन्होंने कहा कि बेटी भाग्य से नहीं, बल्कि सौभाग्य से मिलती है. उनके अनुसार बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती हैं और माता-पिता की सेवा में हमेशा आगे रहती हैं. उनका यह संदेश राह में मिलने वाले श्रद्धालुओं को भी भावुक कर रहा है.
एक पैर के सहारे बाबा धाम की ओर बढ़ रहा दिव्यांग शिवभक्त
असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर हरिद्वार निवासी दिव्यांग शिवभक्त बबलू की आस्था भी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. एक पैर के सहारे और बैसाखी की मदद से वह सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं. रास्ते में जब भक्ति गीत गूंजे तो उन्होंने बैसाखी छोड़कर उत्साह के साथ नृत्य भी किया. उनकी श्रद्धा और आत्मविश्वास देखकर आसपास मौजूद कांवरिये भावुक हो उठे.
आस्था के आगे छोटी पड़ गई हर बाधा
कच्ची कांवरिया पथ पर सामने आई इन दोनों तस्वीरों ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा के आगे कठिन रास्ते, शारीरिक चुनौतियां और परिस्थितियां भी छोटी पड़ जाती हैं. बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट विश्वास ही इन श्रद्धालुओं को लगातार आगे बढ़ने की शक्ति दे रहा है. सावन के इस पावन अवसर पर भक्ति, समर्पण और संकल्प की ये मिसालें हर श्रद्धालु के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
