नामांकन पत्र में तथ्य छुपाने के आरोप में खड़गपुर नप के मुख्य पार्षद पर एफआइआर दर्ज

नामांकन पत्र में तथ्य छुपाने के आरोप में खड़गपुर नप के मुख्य पार्षद पर एफआइआर दर्ज

राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर हुई कार्रवाई, कार्यपालक पदाधिकारी के आवेदन पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

हवेली खड़गपुर . नगर पालिका आम निर्वाचन-2022 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हवेली खड़गपुर नगर परिषद के मुख्य पार्षद प्रभु शंकर के खिलाफ नामांकन पत्र में कथित रूप से तथ्य छुपाने और गलत जानकारी देने के आरोप में खड़गपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार के निर्देश तथा जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गयी है. मामला दर्ज होने के बाद नगर परिषद की राजनीति में हलचल तेज हो गयी है.

प्राथमिकी दर्ज, पुलिसिया जांच शुरू

जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विशाल मोहन ने हवेली खड़गपुर थाना को आवेदन देकर मुख्य पार्षद के विरुद्ध बिहार नगर पालिका अधिनियम, 2007 की धारा-447 तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया था. आवेदन के आलोक में हवेली खड़गपुर थाना में मुख्य पार्षद प्रभु शंकर के विरुद्ध धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया. थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि इस संबंध में हवेली खड़गपुर थाना कांड संख्या 200/26 दर्ज किया गया है. मामले की जांच शुरू कर दी गयी है और संबंधित पुलिस पदाधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी है.

पूर्व प्रत्याशी की शिकायत पर हुई जांच

बताया जाता है कि नगर के मुलुकटांड़ वार्ड संख्या-22 निवासी व पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी मनीषा कुमारी ने राज्य निर्वाचन आयोग को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि नगर निकाय चुनाव के दौरान प्रभु शंकर ने अपने नामांकन पत्र और शपथ पत्र में महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया है. शिकायत मिलने के बाद आयोग स्तर पर मामले की प्रारंभिक समीक्षा करायी गयी. समीक्षा रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि नाम निर्देशन पत्र में जमीन विवाद से संबंधित दर्ज प्राथमिकी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों का पूर्ण विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया था. आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए जिला पदाधिकारी-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी, मुंगेर को समुचित जांच कर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.

जिला प्रशासन की जांच के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी

जिला प्रशासन द्वारा जांच पूरी किए जाने के बाद यह प्रतिवेदित किया गया कि नामांकन पत्र में आवश्यक तथ्यों को छुपाया गया था. इसके बाद बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की गई. इसी आधार पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने थाने में आवेदन दिया और प्राथमिकी दर्ज कराई गई.

राजनीति चर्चाओं ने पकड़ा जोर

मुख्य पार्षद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद नगर परिषद की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म है. विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों की नजर अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है. वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

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