बॉटम:: कीर्तन ईश्वर की प्राप्ति का है सुगम साधन : मंत्रजापानंद
आनंद संभूति मास्टर यूनिट अमझर के मैदान में चल रहे तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन रविवार को रात्रिकालीन सत्र के साथ संपन्न हो गया
By AMIT JHA | Updated at :
जमालपुर.
आनंद संभूति मास्टर यूनिट अमझर के मैदान में चल रहे तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन रविवार को रात्रिकालीन सत्र के साथ संपन्न हो गया. इससे पहले 72 घंटे का बाबा नाम केवल में अखंड कीर्तन भी संपन्न हुआ. रात्रिकालीन सत्र में 10 विप्लव विवाह संपन्न हुए. जिन्हें पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्व देवानंद अवधूत ने आशीर्वाद दिया. धर्म महासम्मेलन के अंतिम दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. जिसमें आनंद मार्ग के अनुयायियों द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रस्तुति दी गयी. सेवा धर्म मिशन के विश्व स्तरीय सचिव आचार्य मंत्रजापानंद अवधूत ने कहा कि कीर्तन ईश्वर की प्राप्ति का सुगम साधन है. कीर्तन भक्ति और ज्ञान का अद्वितीय माध्यम है. जिसके माध्यम से एक व्यक्ति ईश्वर के साथ गहरा संवाद स्थापित कर सकता है. उन्होंने बताया कि कीर्तन की शक्ति व्यक्ति को अविरल ध्यान, स्थिरता और आनंद की अनुभूति देता है. यह एक अद्वितीय विधि है. जो हमें मन, शरीर और आत्मा के संगम के अनुभव को आदर्श दर्शाती है. उन्होंने कहा कि कीर्तन से हम अपने मन को संयमित कर सकते हैं और इंद्रियों को विषय के प्रति वैराग्य की प्राप्ति कर सकते हैं. यह हमें अविरल स्थिति में रहने की क्षमता प्रदान करता है और हमारे जीवन को धार्मिक और आध्यात्मिक से भर देता है. वास्तव में कीर्तन एक विशेष तरीका है. जिसके माध्यम से हम समस्त जगत के साथ सामंजस्य का अनुभव कर सकते हैं. यह हमें साथी बनता है. जो हमें ईश्वर के साथ अनन्य रूप से जोड़ता है. कीर्तन हमें सच्चे सुख और आनंद की प्राप्ति का मार्ग प्रदान करता है. यह हमारे मन को परम शांति की अवस्था में ले जाता है. जहां हम ईश्वरीय प्रेम और आनंद का अनुभव करते हैं. कीर्तन एक साधन है. जो हमें समाज के बंधनों से मुक्त करती है और मानसिक स्वतंत्रता का अनुभव कराती है.
देर रात संपन्न हुआ विप्लव विवाह
देर रात्रि संपन्न विप्लव विवाह में वर पक्ष की ओर से आचार्य अनिर्वाननंद अवधूत एवं वधू पक्ष से आनंद मार्ग की महिला पुरोहित अवधुतिका आनंद आचार्या थी. वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ विवाह में परम ब्रह्म तथा मार्ग गुरुदेव के नाम पर शपथ ग्रहण कर कहा कि इस विवाह के साक्षी है. साथ सभी लोगों ने नव दंपति के सुख में जीवन के लिए कामना की. इस विवाह की विशेषता यह थी कि महिला पुरोहित द्वारा इस वैवाहिक कार्यक्रम को संपन्न कराया गया. महिला पुरोहित ने कहा कि जाति, रंगभेद, नस्लवाद और दहेज प्रथा को दूर करने के लिए इस अंतरजातीय विवाह को संपन्न कराया गया. आनंद मार्ग पद्धति से जो विवाह होता है. वह बिना दहेज के होता है. इस विवाह में वर वधु दोनों के परिवार की सहमति आवश्यक होती है. आनंद मार्ग प्रचारक संघ की अवधुतिका आनंद विष्णु माया आचार्या का कहना था कि महिला तो भौतिक स्तर पर स्वावलंबी बन रही है, परंतु उन्हें मानसी के एवं आध्यात्मिक स्तर पर भी विकसित होने का अवसर प्रदान करना होगा. महिलाओं को केवल पुरोहित का अधिकार ही नहीं देते, बल्कि महिलाओं द्वारा वैवाहिक कार्यक्रम, दाह संस्कार, श्राद्ध कर्म करने का भी अधिकार देते हैं.