Bichchu Bam Kanwar Yatra: सावन के महीने में सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कच्ची कांवरिया पथ पर पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतो अपनी अनोखी ‘बिच्छू यात्रा’ के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. वे दोनों हाथों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं और पिछले दो वर्षों से देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों की पदयात्रा कर चुके हैं.
मुंगेर. सावन में सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाला कांवरिया पथ हर वर्ष आस्था और तपस्या के अनोखे दृश्यों का साक्षी बनता है. कोई दंडवत यात्रा करता है, कोई भारी कांवर उठाकर पैदल चलता है, लेकिन असरगंज कच्ची कांवरिया पथ पर इस बार एक ऐसे शिवभक्त ने लोगों को ठहरकर देखने पर मजबूर कर दिया है, जो दोनों हाथों के बल ‘बिच्छू बम’ बनकर बाबाधाम की ओर बढ़ रहा है.
यह अनोखी यात्रा कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतो. उनका संकल्प, धैर्य और भक्ति देखकर रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु और स्थानीय लोग उन्हें प्रणाम कर रहे हैं.
हाथों के बल पूरी कर रहे हैं बाबाधाम की कठिन यात्रा
राजकुमार महतो पिछले वर्ष से सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक ‘बिच्छू यात्रा’ कर रहे हैं. इस यात्रा में वे अपने दोनों हाथों के बल आगे बढ़ते हैं और शरीर को विशेष मुद्रा में रखते हुए धीरे-धीरे लंबी दूरी तय करते हैं.
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उन्हें यह यात्रा पूरी करने में लगभग एक महीना लगा था. इस वर्ष अब तक 12 दिनों में वे असरगंज तक पहुंच चुके हैं.
उनका कहना है कि इस बार वे अकेले यात्रा कर रहे हैं और उनके साथ एक साइकिल भी है, जिसके कारण उनकी गति पहले की तुलना में कुछ धीमी है.
दो वर्षों से देशभर के तीर्थों की यात्रा
राजकुमार महतो ने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे पूरे भारत की धार्मिक यात्रा कर रहे हैं. इस दौरान वे 12 ज्योतिर्लिंगों, चार धाम और 51 शक्तिपीठों में से 21 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं.
इसके अलावा उन्होंने मथुरा, वृंदावन, खाटू श्याम, सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, जीण माता, तुंगनाथ, बागेश्वर धाम, चित्रकूट और अनुसुइया माता मंदिर सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा भी पूरी की है.
बागेश्वर धाम में मिला आध्यात्मिक अनुभव
राजकुमार महतो के अनुसार जब वे बागेश्वर धाम पहुंचे, तब उन्हें एक अलग प्रकार की आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव हुआ. उसी अनुभव ने उन्हें और अधिक मंदिरों के दर्शन करने के लिए प्रेरित किया.
वे कहते हैं कि यह यात्रा किसी प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनकी श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है.
‘भोलेनाथ की कृपा से कठिनाई महसूस नहीं होती’
राजकुमार महतो ने बताया कि वे एक बार में लगभग 60 से 70 फीट तक हाथों के बल चलते हैं. सामान्य व्यक्ति के लिए यह बेहद कठिन लग सकता है, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें इसमें कोई विशेष कठिनाई महसूस नहीं होती.
उनके शब्दों में, “यह सब भोलेनाथ की कृपा है. जब श्रद्धा सच्ची होती है, तो शरीर भी उसी शक्ति के अनुसार साथ देने लगता है.”
Bichchu Bam Kanwar Yatra: कांवरिया पथ पर आकर्षण का केंद्र बने श्रद्धालु
असरगंज कच्ची कांवरिया पथ पर गुजरने वाले श्रद्धालु राजकुमार महतो को देखकर रुक जाते हैं. कई लोग उनका वीडियो बनाते हैं, तो कई लोग उनके लिए जल, फल और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई प्रकार की कठिन कांवर यात्राएं देखी हैं, लेकिन हाथों के बल ‘बिच्छू बम’ बनकर इतनी लंबी यात्रा करने वाला श्रद्धालु पहली बार देखा है.
उनकी यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सावन में शिवभक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई भक्त अपने संकल्प और तपस्या के माध्यम से उसे जीवन का साधन बना लेते हैं.
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