असरगंज की आस्था के केंद्र बाबा हाथीनाथ, 200 वर्षों से चली आ रही परंपरा में हर शुभ कार्य से पहले टेकते हैं माथा

असरगंज की पहचान बाबा हाथीनाथ मंदिर से जुड़ी है, जिसकी 200 साल पुरानी आस्था हर शुभ कार्य का आधार है. बाढ़ में मरे हाथी से जुड़ी इस मंदिर की कहानी जानने के लिए पढ़ें.

असरगंज नगर पंचायत का इतिहास ग्राम देवता बाबा हाथीनाथ के बिना अधूरा माना जाता है. मुख्य बाजार स्थित बाबा हाथीनाथ का मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि असरगंज की आस्था, परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि बाबा हाथीनाथ ही पूरे नगर की रक्षा करते हैं. यही वजह है कि हर शुभ कार्य से पहले यहां माथा टेकना अनिवार्य माना जाता है.

बाढ़ में हाथी की मौत से जुड़ी है मंदिर की कहानी

बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार, बाबा हाथीनाथ मंदिर का इतिहास लगभग 200 वर्षों पुराना है. स्थानीय जनश्रुति के मुताबिक, एक बार क्षेत्र में भीषण बाढ़ आयी थी. इसी दौरान एक हाथी उक्त स्थान पर झाड़ी में फंसकर मर गया था. बाद में वहां हाथी के आकार का एक पिंड दिखाई दिया. लोगों ने इसे लेकर अनहोनी की आशंका जतायी और स्थल पर पूजा-अर्चना शुरू कर दी.

समय के साथ उस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया और इसे बाबा हाथीनाथ का नाम दिया गया. एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, हाथी और नाथ यानी भगवान शिव के स्वरूप के कारण इन्हें हाथीनाथ कहा गया. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से बाबा की आराधना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है.

हर बड़े पर्व पर सबसे पहले उमड़ती है भीड़

बाबा हाथीनाथ मंदिर के प्रति लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि नववर्ष, रामनवमी और दीपावली सहित हर बड़े पर्व पर सबसे पहले बाबा के दरबार में ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. लोग पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं. स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ नगर की पहचान भी बन चुका है.

11 दिवसीय वार्षिक पूजनोत्सव है विशेष

बाबा हाथीनाथ मंदिर में प्रत्येक वर्ष भादो माह के प्रथम शनिवार से 11 दिवसीय वार्षिक पूजनोत्सव शुरू होता है. इसका समापन मंगलवार को किया जाता है. इस दौरान सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लाकर बाबा का जलाभिषेक किया जाता है.

मंदिर में आचार्य कुंदन मोदी, पंडित अमोद मिश्रा और पुजारी धनंजय झा द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ और विशेष पूजा-अर्चना करायी जाती है. पूजनोत्सव के दौरान पूरा बाजार भक्तिमय हो जाता है. सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में लगी रहती है.

परंपरा और आस्था का जीवंत केंद्र

बाबा हाथीनाथ मंदिर असरगंज की धार्मिक परंपराओं का जीवंत केंद्र है. यहां की मान्यताएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं. स्थानीय लोगों के लिए बाबा हाथीनाथ केवल ग्राम देवता नहीं, बल्कि नगर की रक्षा और मंगलकामना से जुड़ी आस्था का प्रतीक हैं.

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By Prabhat khabar news desk

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