लापरवाह सिस्टम : डीएम का आदेश भी बेअसर, एक सप्ताह में करनी थी कार्रवाई, बीत गये 25 दिन
9 लाख 68 हजार 867 रुपये की थी योजना
By BIRENDRA KUMAR SING | Updated at :
असरगंज प्रखंड में मनरेगा योजना में अनियमितता का मामला, डीएम ने उप विकास आयुक्त को कार्रवाई को लेकर दिया था निर्देश
मुंगेर. जिले में प्रशासनिक सिस्टम लापरवाह हो गया है. इसके कारण भ्रष्टाचार में लिप्त दोषियों पर भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है. हद तो यह है कि यहां डीएम का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है, क्योंकि असरगंज प्रखंड में मनरेगा योजना में बरती गयी अनियमितता की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को पत्र भेज कर दोषियों पर कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह के अंदर प्रतिवेदन देने को कहा था, लेकिन एक सप्ताह तो दूर, तीन सप्ताह बीतने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पायी है.
तीन सप्ताह के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
मनरेगा योजना में अनियमितता मामले में डीएम निखिल धनराज ने 22 जनवरी 2026 को कार्रवाई के लिए उप विकास आयुक्त को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने कहा था कि योजना की जांच करायी गयी. जांच प्रतिवेदन में योजना से संदर्भित अभिलेख संसाधरण, प्राक्कलन निर्माण से मापी पुस्त अंकण, त्रुटिपूर्ण मापी पुस्त, अहस्ताक्षरित कार्यादेश एवं एकरारनामा एवं कार्य स्थलीय क्रियान्वयन के संदर्भ में कतिपय अनियमितताएं प्रतिवेदित की गयी हैं. योजना क्रियान्वयन में परिलक्षित अनियमितताओं के निमित उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए संबंधितों पर नियमानुकूल अनुशासनिक कार्रवाई के लिए अनुशंसा सहित संपुष्ट प्रतिवेदन संचिका के माध्यम से उपस्थापित करें. डीएम ने एक सप्ताह के अंदर इसे सुनिश्चित करने को कहा था, लेकिन तीन सप्ताह बाद भी कार्रवाई नहीं हो पायी है.
जांच में बड़े पैमाने पर मिली थी अनियमितता
असरगंज प्रखंड के चोरगांव के मुसहरी पुल से बटोकरा पुल तक डांड़ की खुदाई मनरेगा योजना से करायी गयी थी. इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायत हुई थी. इसको लेकर डीएम ने एक तीन सदस्यीय जांच टीम बनायी थी. टीम ने 17 जनवरी 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी. इसमें कहा गया है कि योजना के अभिलेख संधारण, प्राक्कलन निर्माण से मापी पुस्त दर्ज करने एवं योजना की कार्यान्वयन में संबंधित पदाधिकारियों व कर्मियों द्वारा सतर्कता नहीं बरती गयी. योजना में जमकर अनियमितता बरती गयी है. विदित हो कि यह योजना 9 लाख 68 हजार 867 रुपये की थी. जांच रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि योजना में प्राक्कलित राशि के आलोक में भुगतान से पूर्व सक्षम तकनीकी प्राधिकार से मापी पुस्त सत्यापित नहीं पायी गयी, जबकि उपलब्ध कराये गये प्राक्कलन के आलोक में स्थल पर कार्य नहीं पाया गया. यहां तक की एकरारनामा एवं कार्यादेश में कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षर नहीं किया गया है. किसी भी मास्टर रोल में अंकित अंगूठे का निशान को संबंधित व्यक्ति के नाम के साथ सत्यापित नहीं किया गया है.
कहते हैं डीडीसी
डीडीसी अजीत कुमार ने कहा कि कार्रवाई तो हर हाल में करनी ही है. र्तमान में विकसित भारत-जी राम जी कार्यक्रम में व्यस्तताओं के चलते कार्रवाई में विलंब हुआ है. दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा.